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gdp growth rate

वैश्विक अनिश्चितता और यूएस टैरिफ के बीच साल की दूसरी तिमाही में देश की जीडीपी 8.2 प्रतिशत रही. राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने इस उपलब्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को दिया.

GDP Booms: भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 26 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर अवधि) में 8.2 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर हासिल की है, जो कि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की विकास दर 5.6 प्रतिशत से काफी अधिक है.

एसएंडपी ग्लोबल (S&P Global) की बुधवार को आई एक रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है.

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ने भी रिपोर्ट में कहा है कि उद्योगों की सक्रिय रणनीतियां, ट्रेड रिरूटिंग और भौगोलिक विविधीकरण भारत को टैरिफ के झटके से उबरने में मदद कर सकते हैं.

फिच रेटिंग्स के लेटेस्ट ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक के अनुसार, अगले तीन वर्षों में देश 6 प्रतिशत से ऊपर की विकास दर बनाए रखने का अनुमान है.

नीति आयोग ने रिपोर्ट में कहा कि 2030 के लिए विजन यह है कि भारत वैश्विक केमिकल मूल्य श्रृंखला में 5-6 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ वैश्विक केमिकल मैन्युफैक्चरिंग में महाशक्ति बन जाए.

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) के चेयरमैन नितिन परांजपे ने कहा है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था सस्टेनेबल और समावेशी विकास की ओर तेजी से बढ़ रही है.

उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने कहा कि अमेरिका का डी-ग्लोबलाइजेशन की ओर रुख वैश्वीकरण के एक नए अवतार की ओर जा सकता है और भारत नए 'सेंटर ऑफ ग्रेविटी' में से एक के रूप में उभरने के लिए बेहतर स्थिति में है.

रिपोर्ट में कहा गया है, "वित्त वर्ष 25 में वास्तविक जीडीपी में 6.5% की वृद्धि हुई, जो दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुरूप है. यह वृद्धि भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार अनिश्चितताओं से चिह्नित चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बीच हुई."

मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, भारत में लगातार सुधार के संकेत दिख रहे हैं. सरकारी खर्च बढ़ रहा है और आरबीआई अधिक सहायक या 'शांत' नीति रुख की ओर बढ़ रहा है. यह, मुद्रास्फीति में कमी के साथ मिलकर शेयर बाजार के लिए अच्छा माहौल बना रहा है.