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Indo-Pacific

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौर में भारत की विदेश नीति का सबसे अहम पहलू ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ और ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ है. भारत एक ओर अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ क्वाड के जरिए हिंद-प्रशांत में सहयोग बढ़ा रहा है, तो दूसरी ओर रूस, चीन और ग्लोबल साउथ के साथ BRICS जैसे मंचों पर भी सक्रिय है.

भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक P-8I विमान रिमपैक 2026 नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका के होनोलूलू पहुंच गया है.

जापान में भारत के राजदूत सिबी जॉर्ज ने टोक्यो में जापान के रक्षा मंत्री जनरल नाकातानी से शिष्टाचार भेंट की. इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा सहयोग को बढ़ाने, क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को समर्थन देने पर विचारों का आदान-प्रदान किया.

Act East Policy : पीएम मोदी की एक्ट ईस्ट पॉलिसी ने भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया में एक सक्रिय खिलाड़ी बना दिया है. व्यापार, रक्षा, संस्कृति और कूटनीति में महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज की गई हैं.

भारतीय नौसेना का पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन थाईलैंड के सताहिप बंदरगाह पहुंचा, जहां रॉयल थाई नेवी के साथ संयुक्त अभ्यास और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा. यह दौरा 'सागर' नीति के तहत समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को सशक्त करेगा.

Maldives China Connection: चीन लोन और आर्थिक मदद के नाम पर श्रीलंका पाकिस्तान को काफी बर्बाद कर चुका है. अब मालदीव इसके जाल में फंसता दिख रहा है.

प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा कि भारत का सहयोग मानव मूल्यों पर आधारित है. गौरतलब है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये टिप्पणी ऐसे वक्त में सामने आई है, जब प्रशांत महासागर क्षेत्र में चीन का आक्रामक रुख देखने को मिल रहा है.

Stockholm: विदेश मंत्री जयशंकर ने ईयू-इंडिया पैसिफिक मिनिस्ट्रियल फोरम में इंडो-पैसिफिक के बारे में अपने विचार साझा करते हुए यह टिप्पणी की.

बेल्जियम की विदेश मंत्री हादजा लाहबीब के साथ पहली बैठक में जयशंकर ने द्विपक्षीय संबंधों और बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई.