कलम की ताकत ने बंदूकों को किया शांत, गया के ‘मगध सुपर 30’ ने कैसे बदली नक्सल प्रभावित इलाके की तकदीर
खान सर और कोचिंग संस्थाओं को लेकर जारी बहस के बीच, बिहार कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी अभयानंद की आत्मकथा 'असीम' का यह अंश 'सुपर-30' की शुरुआत की एक अलग कहानी सामने लाता है. इसमें अभयानंद बताते हैं कि किस तरह आनंद कुमार के साथ मिलकर उन्होंने आर्थिक रूप से वंचित लेकिन मेधावी छात्रों के लिए इस पहल की नींव रखी थी. आज जब कोचिंग संस्थानों की भूमिका और उनके सामाजिक प्रभाव पर सवाल उठ रहे हैं, तब 'सुपर-30' की इस शुरुआती यात्रा को उसके सह-संस्थापक की नज़र से पढ़ना दिलचस्प भी है और प्रासंगिक भी.





