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Mahabharata

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कृति ‘रश्मिरथी’ हिंदी साहित्य का एक कालजयी खंडकाव्य है, जो महाभारत के महान योद्धा कर्ण के जीवन, संघर्ष, दान, वीरता और अंतिम बलिदान पर केंद्रित है.

पाशुपतास्त्र भगवान शिव की दिव्य शक्ति का प्रतीक था. इसे पाने के लिए केवल शौर्य नहीं, बल्कि तप, संयम और भक्ति की भी आवश्यकता थी. आज भी यह अस्त्र भारतीय पौराणिक कथाओं में रहस्य और शक्ति का प्रतीक बना हुआ है.

Lord Vishnu Sudarshan Chakra: सुदर्शन चक्र केवल एक अस्त्र नहीं, बल्कि भगवान विष्णु की दिव्य चेतना का प्रतीक है. इसका वेग लोहा-पत्‍थर और पर्वतों को भी काट डालने वाला है. यह दैवीय अस्‍त्र अधर्म का अंत करता है.

भगवान श्रीकृष्ण ने अपना विराट रूप दिखाते समय अर्जुन को बतलाया था कि वह कुरुक्षेत्र में सभी पापियों को नष्ट करने के लिए प्रकट हुए हैं, क्योंकि उन्हें उस समय धरती से अधर्म का नाश करना था, इसलिए उन्होंने करोड़ों योद्धाओं को युद्ध के जरिए मुक्ति दी.

हमारे पौराणिक इतिहास में “सहस्त्रबाहु” (1 हजार हाथों वाले) या हज़ार भुजाओं की शक्ति वाले योद्धाओं के नाम आते हैं. मौजूदा युग से पहले त्रेता और द्वापर युग में ऐसे बाहुबली भी थे जिनके 1 हजार भुजाएं थीं, और कइयों में तो 1-1 हजार हाथियों जितना बल था.

महाभारत और रामायण हमारे सबसे बड़े महाकाव्य हैं. रामायण सृष्टि के दूसरे युग त्रेता, तो वहीं महाभारत तीसरे युग द्वापर की कहानी है, जिनके बीच (लाखों वर्ष) समय का बहुत बड़ा अंतर रहा. ऐसी कई शख्सियत थीं, जो रामायण और महाभारत-काल दोनों का हिस्सा रहीं.

महाभारत सिर्फ एक प्राचीन ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर पहलू का आदर्श है. इसके अध्ययन से हमें बुराई पर अच्‍छाई की जीत के तौर-तरीके, भारत का लाखों बरस का इतिहास और मानवता के अनंत सिद्धांत भी सीखने को मिलते हैं.

'रश्मिरथी' राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है, जो महाभारत के योद्धा 'कर्ण' के जीवन चरित्र एवं उनके संवाद पर आधारित है.

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