‘जाति नहीं, कर्म से महान बनता है इंसान’; 75 साल बाद भी क्यों प्रासंगिक है दिनकर की ‘रश्मिरथी’?
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कृति ‘रश्मिरथी’ हिंदी साहित्य का एक कालजयी खंडकाव्य है, जो महाभारत के महान योद्धा कर्ण के जीवन, संघर्ष, दान, वीरता और अंतिम बलिदान पर केंद्रित है.
ये है सबसे विनाशकारी दिव्यास्त्र, पृथ्वी पर कभी नहीं किया गया इस्तेमाल, रामायण-महाभारत काल में यह किनके पास था?
पाशुपतास्त्र भगवान शिव की दिव्य शक्ति का प्रतीक था. इसे पाने के लिए केवल शौर्य नहीं, बल्कि तप, संयम और भक्ति की भी आवश्यकता थी. आज भी यह अस्त्र भारतीय पौराणिक कथाओं में रहस्य और शक्ति का प्रतीक बना हुआ है.
Sudarshana Chakra: कितना विध्वंसक था यह दिव्यास्त्र, किसने किया इसका निर्माण? पुराणों से जानिए पूरी कहानी
Lord Vishnu Sudarshan Chakra: सुदर्शन चक्र केवल एक अस्त्र नहीं, बल्कि भगवान विष्णु की दिव्य चेतना का प्रतीक है. इसका वेग लोहा-पत्थर और पर्वतों को भी काट डालने वाला है. यह दैवीय अस्त्र अधर्म का अंत करता है.
Shri Krishna ही महाकाल थे: जब युद्धभूमि में प्रकट हुआ माधव का भयंकर रूप…अर्जुन ने देखा- उनके मुख में समा रहे थे सारे योद्धा
भगवान श्रीकृष्ण ने अपना विराट रूप दिखाते समय अर्जुन को बतलाया था कि वह कुरुक्षेत्र में सभी पापियों को नष्ट करने के लिए प्रकट हुए हैं, क्योंकि उन्हें उस समय धरती से अधर्म का नाश करना था, इसलिए उन्होंने करोड़ों योद्धाओं को युद्ध के जरिए मुक्ति दी.
धरती पर ये थे वो बाहुबली जिनके पास थीं 1 हजार भुजाएं, बुराइयों के कारण हुई दुर्गति – इनमें से एक ने तो राक्षसराज रावण को भी भींच दिया था
हमारे पौराणिक इतिहास में “सहस्त्रबाहु” (1 हजार हाथों वाले) या हज़ार भुजाओं की शक्ति वाले योद्धाओं के नाम आते हैं. मौजूदा युग से पहले त्रेता और द्वापर युग में ऐसे बाहुबली भी थे जिनके 1 हजार भुजाएं थीं, और कइयों में तो 1-1 हजार हाथियों जितना बल था.
वे कौन सी शख्सियते हैं, जो रामायण और महाभारत दोनों काल में थीं?
महाभारत और रामायण हमारे सबसे बड़े महाकाव्य हैं. रामायण सृष्टि के दूसरे युग त्रेता, तो वहीं महाभारत तीसरे युग द्वापर की कहानी है, जिनके बीच (लाखों वर्ष) समय का बहुत बड़ा अंतर रहा. ऐसी कई शख्सियत थीं, जो रामायण और महाभारत-काल दोनों का हिस्सा रहीं.
MAHABHARATA: विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य, जिसमें 1 लाख से ज्यादा श्लोक, इसके पात्र, कथाएं और उपदेश हमेशा देते रहेंगे प्रेरणा
महाभारत सिर्फ एक प्राचीन ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर पहलू का आदर्श है. इसके अध्ययन से हमें बुराई पर अच्छाई की जीत के तौर-तरीके, भारत का लाखों बरस का इतिहास और मानवता के अनंत सिद्धांत भी सीखने को मिलते हैं.
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की 50वीं पुण्यतिथि पर दिल्ली में मनेगा ‘रश्मिरथी पर्व’, जानिए कैसे होगा नाट्य-मंचन और पुस्तक विमोचन
'रश्मिरथी' राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर' की प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है, जो महाभारत के योद्धा 'कर्ण' के जीवन चरित्र एवं उनके संवाद पर आधारित है.
जहां दुर्योधन ने पांडवों के लिए बनवाया था लाक्षागृह, वो जमीन होगी अतिक्रमण-मुक्त? बागपत न्यायालय का आया फैसला- हिंदू पक्ष को अधिकार, बदरुद्दीन की मजार अवैध
Baghpat Court Lakshagraha News: उत्तर प्रदेश में बागपत जिले के कृष्ण बोध आश्रम (लाक्षाग्रह) और बदरुद्दीन की दरगाह का विवाद सुलझने की ओर है. इस मामले में अब न्यायालय ने निर्णय सुना दिया है.
Gita jayanti 2023: गीता जयंती आज, अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में कुरुक्षेत्र पहुंचे गृहमंत्री शाह, बोले- महान संस्कृति को आगे बढ़ा रही BJP
International Gita Mahotsav 2023 Kurukshetra: आज गीता जयंती के अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री और भाजपा नेता अमित शाह कुरुक्षेत्र आए. उनके अलावा गुरुवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने भी ब्रह्मसरोवर पर महाआरती की.







