Demons with Thousand Arms: भारतीय पौराणिक इतिहास में ऐसे भी योद्धाओं के नाम सामने आते हैं, जिनके 1-1 हजार भुजाएं थीं. इतनी भुजाएं होने के कारण उनमें अपार बल था. हालांकि, अहंकार-वश वे अधर्मी हो गए. भगवान विष्णु (God) ने मनुष्यावतार धारण कर उन्हें खुद दंडित किया. यदि प्राचीन काल में 1-1 हजार भुजाओं वाले उन योद्धाओं को नहीं मारा जाता, तो वे संसार में रावण (Ravana) से भी ज्यादा विनाश कर डालते.
आज हम आपको यहां एक-एक हजार हाथों वाले या कहें हज़ार भुजाओं की शक्ति वाले योद्धाओं के बारे में बताएंगे.
ऐसे योद्धाओं का वर्णन विश्व के सबसे बड़े महाकाव्य महाभारत (Mahabharata), श्रीमद्भागवत महापुराण, स्कंद पुराण और पद्म पुराण में मिलता है. उन योद्धाओं के पास 1 हजार भुजाएं थीं, जो कि उन्हें उनकी कठोर तपस्या से वरदान में मिली थीं. मगर, उनके अहंकार और बुरे कर्मों ने अंतत: उनकी दुर्गति करवा दी.
1. सहस्त्रबाहु अर्जुन
‘महाभारत‘ ग्रंथ, स्कंद पुराण और पद्म पुराण में “सहस्त्रबाहु अर्जुन” (Sahasrabahu Arjun) के बारे में विस्तार से बताया गया है. जैसा कि इसके नाम में ही – सहस्त्र शब्द है, जिसका मतलब होता है- हजार, और ‘बाहु’ यानी कि भुजा (हाथ). अर्थात- हजार भुजाओं वाला.

इस योद्धा का वास्तविक नाम कार्तवीर्य अर्जुन (Sahasrabahu Arjun) था. यह हैहय वंश का क्षत्रिय राजा था, जो हज़ार भुजाओं वाला था. कहा जाता है कि त्रेतायुग में हैहय वंश के क्षत्रियों की मनमानी से पृथ्वी पर पाप का बोझ बढ़ गया था. इसी वंश में एक हजार हाथों वाला राजा सहस्त्रार्जुन हुआ था. उसका वास्तविक नाम कार्तवीर्य अर्जुन था, जिसे दत्तात्रेयजी से एक हज़ार भुजाएं वरदानस्वरूप मिली थीं, इसलिए उसे “सहस्त्रबाहु अर्जुन” कहा जाता था. वह बड़ा बलशाली था. उसने राक्षसराज रावण को भी हरा दिया था और उसे बंदी बना लिया था.

सहस्त्रबाहु अर्जुन एक बार ऋषि जमदग्नि के आश्रम में आया, वह उन्हें अपमानित करके वहां से चला गया. जमदग्नि के पुत्र परशुराम को पता चला तो उन्होंने सहस्त्रबाहु को उसी की महिष्मति नगरी में जाकर मार डाला. परशुराम ने अपने फरसे से सहस्त्रबाहु की हजार भुजाओं को काट डाला था. उसके टुकड़े-टुकड़े कर दिए.
सहस्त्रबाहु (Sahasrabahu Arjun) के गुस्साए पुत्रों ने परशुराम की अनुपस्थिति में उनके पिता जमदग्नि की हत्या कर दी. परशुराम जब तीर्थयात्रा से लौटे तो उन्हें अपने पिता की हत्या की सूचना मिली. फिर उन्होंने सहस्त्रबाहु के पुत्रों, उनके सगे-संबंधियों समेत हैहय वंश का समूचा नाश करने का संकल्प लिया. वह अकेले ही फरसा लेकर उन्हें मारते चले गए. परशुराम ने रक्त की नदियाँ बहा दीं. ऐसा कुल इक्कीस बार किया, तब जाकर उनके प्रतिशोध की अग्नि शांत हुई.
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2. बाणासुर
हजार भुजाओं वाले महावीरों में दूसरा नाम था- बाणासुर
श्रीमद्भागवत महापुराण में बाणासुर की कथा मिलती है. कहते हैं कि बाणासुर ने भगवान शिव को प्रसन्न कर 1 हजार भुजाओं की ताकत प्राप्त कर ली थी. उसने यह वरदान भी पाया कि अत्यंत संकट आने पर स्वयं शिव उसकी रक्षा के लिए प्रकट होंगे. हजार भुजाएं होने के कारण बाणासुर किसी से नहीं हारा. उसे अपनी ताकत और माया का अहंकार हो गया था. यहां तक कि वह खुद आराध्य देव की अवहेलना भी करने लगा. उसने अनेक राजा-ऋषियों को मार डाला था. जब भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया, तब बाणासुर हारा. श्रीकृष्ण ने चक्र से उसकी भुजाएं काट डालीं. वह शरण में आ गया तो उसके 2 हाथ छोड़ दिए.

बाणासुर शोणितपुर (शोनितपुर) का शासक था. यह स्थान आज के समय में भारत के असम (Assam) या अरुणाचल प्रदेश क्षेत्र में माना जाता है, हालांकि कुछ किंवदंतियों में इसे अन्य स्थानों से भी जोड़ा गया है.

श्रीकृष्ण से बाणासुर के युद्ध का विवरण श्रीमद्भागवत महापुराण (स्कंध 10, अध्याय 62) में मिलता है. अति प्राचीन काल में बाणासुर ने शिवजी की घोर तपस्या की थी. उससे प्रसन्न होकर शिवजी ने उसे वर दिए. और जब शिवजी ने बाणासुर में अहंकार देखा तो उससे कहा कि एक दिन तुम्हारा युद्ध स्वयं भगवान श्रीकृष्ण से होगा. द्वापर युग के अंतिम चरण में बाणासुर ने श्रीकृष्ण के पोते अनिरुद्ध को बंदी बना लिया था, तब द्वारका से सेना के साथ श्रीकृष्ण ने बाणासुर पर हमला किया.
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