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MUTUAL FUND

म्यूचुअल फंड निवेश में सिर्फ रिटर्न देखना पर्याप्त नहीं है. एक्सपेंस रेशियो (TER) आपके कुल रिटर्न पर लंबी अवधि में बड़ा असर डाल सकता है.

बजट के डेट चेंज को लेकर सरकार ने जो तर्क दिया वह ये था कि भारत में नया वित्तीय वर्ष यानी कि Financial Year 1 अप्रैल से शुरू होता है. ऐसे में जब बजट फरवरी के अंत में पेश होता था तब उसके बाद संसद में उस पर चर्चा होती है और फिर उसे संसद से पास करवाया जाता है. इस प्रक्रिया में काफी समय लग जाता है.

Mutual Fund SIP: विशेषज्ञों के अनुसार, SIP एक ऐसा तंत्र है जिसके जरिये आप अपने दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बाजार के स्तर की चिंता किए बिना ज्यादातर सक्रिय आय से नियमित रूप से निवेश कर सकते हैं.

दिसंबर 2024 में म्यूचुअल फंड फोलियो की संख्या रिकॉर्ड 22.50 करोड़ के पार पहुंच गई, जिसमें रिटेल म्यूचुअल फंड फोलियो में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई.

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के एसेट्स का विकास 2025 में भी जारी रहने की संभावना है. रिटेल निवेशकों के बीच बढ़ती पैठ और सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्स (SIPs) के माध्यम से इक्विटी फंड्स में बढ़ते फ्लो इसकी मुख्य वजह बनेंगे.

अक्टूबर 2024 में बैंकों का एनबीएफसी को दिया गया ऋण 15.4 ट्रिलियन रुपये था, जो पिछले साल की तुलना में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है.

म्यूचुअल फंड निवेशक डायरेक्ट और रेगुलर दोनों प्लान के बीच किसी एक का चयन कर सकते हैं. किसी म्यूचुअल स्कीम के रेगुलर प्लान को एजेंटों और बैंकों के माध्यम से खरीदा जा सकता हैं.

इंटरनल एनालिसिस में सेबी ने पाया कि बीते 5 सालों में  सक्रिय रूप से मैनेज की गई 26.67 फीसदी इक्विटी स्कीम्स ने इंडेक्स से ज्यादा या उसके बराबर रिटर्न दिया है.

सेबी ये कदम उठा रहा है ताकि फंड बेहतर परफार्म करें. देखा जाता है कि कुछ फंड्स को एक्टिवली मैनेज करने की जरूरत होती है