सिर्फ हंगामा खड़ा करना मकसद नहीं… जानिए आज भी क्यों प्रासंगिक हैं दुष्यंत कुमार की ये अमर पंक्तियां?
दुष्यंत कुमार सिर्फ कवि नहीं, बल्कि आम आदमी की बेचैनी, संघर्ष और बदलाव की उम्मीद की आवाज थे. ‘साये में धूप’ जैसी कृति और उनकी अमर पंक्तियां आज भी व्यवस्था पर सवाल उठाने और बदलाव की उम्मीद जगाने का काम करती हैं.





