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Sikh Riot

हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने कहा कि मैं आज भी 1984 के उन दिनों को याद करके सिहर उठता हूं, जब असहाय और निर्दोष सिख पुरुषों, महिलाओं और बच्चों का बिना सोचे-समझे कत्लेआम किया गया था.