आरक्षण तो मिल गया, पर ‘आज़ादी’ कब? चलम की किताब से पीएम मोदी के संकल्प तक का सच
चलम ने अपनी रचनाओं में स्त्री को केवल माता, पत्नी या बहन के पारंपरिक रूपों में सीमित करने से इनकार किया. उन्होंने स्त्री को एक स्वतंत्र, इच्छाशक्ति-संपन्न और कामुक व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया.





