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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज़-III (GEC-III) स्कीम को मंज़ूरी दे दी है. यह ऐतिहासिक पहल भारत के इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (InSTS) को मज़बूत करेगी, जिससे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावाट (GW) तक रिन्यूएबल एनर्जी की निकासी हो सकेगी.

अन्ना मणि, जिन्हें 'भारत की वेदर वुमन' कहा जाता है, मौसम विज्ञान और ओजोन अध्ययन में अग्रणी थीं. उन्होंने भारत में मौसम उपकरणों का विकास किया और ओजोनसोंडे जैसे उपकरण तैयार किए.

भारत ने पिछले 11 वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है, सौर और पवन ऊर्जा में अग्रणी बनकर वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल की है, जल, सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा में विस्तार कर पड़ोसी देशों को बिजली निर्यात भी किया जा रहा है.

भारत की पवन ऊर्जा क्षमता में अगले दो वित्त वर्षों में दोगुना से अधिक वृद्धि होने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2023-25 ​​में 3.4 गीगावाट की तुलना में औसतन 7.1 गीगावाट (GW) होगी.

भारत में जिंक की खपत में तेजी से वृद्धि होने की उम्मीद है, अंतर्राष्ट्रीय जिंक एसोसिएशन (IZA) के अनुमान के मुताबिक अगले 10 वर्षों में जिंक की खपत 11 लाख टन से बढ़कर 20 लाख टन से अधिक हो जाएगी.

अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने बुधवार को गुजरात के खावड़ा में स्थित 30,000 मेगावाट क्षमता वाले दुनिया के सबसे बड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट में पहली 250 मेगावाट की पवन ऊर्जा क्षमता का संचालन शुरू कर दिया है.