Farming Tips: अंबाला/मनजीत: उत्तर भारत में मौसम के बदलते मिजाज ने किसानों की नींद उड़ा दी है. अंबाला और आसपास के इलाकों में मार्च के महीने में ही तापमान 33 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को पार कर गया है. आमतौर पर अप्रैल के अंत में दिखने वाली यह गर्मी इस बार समय से पहले आ गई है, जो सीधे तौर पर गेहूं की सुनहरी बालियों के लिए ‘काल’ साबित हो रही है. कृषि विशेषज्ञों और किसानों का मानना है कि यदि गर्मी का यही दौर जारी रहा, तो गेहूं की पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है.
दाने बनने की प्रक्रिया पर ‘ब्रेक’
वर्तमान में गेहूं की फसल उस नाजुक मोड़ पर है जहां बालियों के भीतर दाना आकार ले रहा है. किसानों ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि इस अवस्था में फसल को ठंडे वातावरण की आवश्यकता होती है ताकि दाना पुष्ट और वजनी बन सके. अचानक बढ़ी गर्मी के कारण दाना अपनी स्वाभाविक ग्रोथ नहीं कर पा रहा है. किसानों की मानें तो गर्मी की वजह से दाना ‘जीरा टाइप’ यानी बिल्कुल छोटा और सिकुड़ा हुआ रह जाएगा. आशंका जताई जा रही है कि इससे फसल की गुणवत्ता और मात्रा में 60 से 70 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है.
कोहरा बना ‘कोढ़ में खाज’
बीते दिनों अंबाला में छाए घने कोहरे ने भी किसानों की मुश्किलों को कम करने के बजाय बढ़ा दिया है. हालांकि सुबह तापमान में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन किसानों का कहना है कि दिन की तेज धूप और सुबह की अत्यधिक नमी का यह मेल फसलों में बीमारियों को न्योता दे रहा है. तापमान में आ रहे इस उतार-चढ़ाव से पौधों की प्रतिरोधक क्षमता कम हो रही है और वे फफूंद जैसी बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं.
कृषि विभाग की सलाह: सिंचाई में बरतें सावधानी
कृषि विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जसविंदर सैनी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है. उन्होंने कहा कि बढ़ते तापमान से दाने को सिकुड़ने से बचाने के लिए किसान खेतों में हल्की सिंचाई करें. हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी है कि सिंचाई ज्यादा गहरी न हो, क्योंकि तेज हवाएं चलने पर गेहूं की फसल जमीन पर गिर सकती है (लॉजिंग), जिससे नुकसान दोगुना हो जाएगा.
पोटेशियम नाइट्रेट बनेगा ढाल
विशेषज्ञों ने किसानों को पोटेशियम नाइट्रेट के छिड़काव की सलाह दी है. डीडीए सैनी के अनुसार, इसका छिड़काव करने से दाना बनने की प्रक्रिया (Grain filling stage) थोड़ी लंबी खिंच जाती है, जिससे दाना सिकुड़ता नहीं और उसका वजन बना रहता है. राहत की खबर यह है कि 22 मार्च को बारिश की संभावना जताई गई है, जिससे तापमान नीचे आने की उम्मीद है.
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कुल मिलाकर, अंबाला का किसान इस समय प्रकृति की दोहरी मार झेल रहा है. एक तरफ समय से पहले आई गर्मी और दूसरी तरफ बीमारियों का डर. अब किसानों की सारी उम्मीदें आने वाली 22 तारीख की बारिश और कृषि विभाग के वैज्ञानिक तरीकों पर टिकी हैं. यदि मौसम ने साथ नहीं दिया, तो इस साल गेहूं की पैदावार के लक्ष्य को हासिल करना एक बड़ी चुनौती होगी.
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