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ग्लोबल मार्केट में औंधे मुंह गिरा गोल्ड, लेकिन भारत में जेब पर भारी पड़ी टैक्स की मार! जानिए क्या है पूरा गणित?

Gold-Silver Price Today: वैश्विक बाजार में सोना 24% सस्ता हुआ है, जबकि भारत में यह केवल 20% गिरा है. इम्पोर्ट ड्यूटी और कमजोर रुपये के कारण यह अंतर आया है.

Gold Silver Price Today

Gold-Silver Price Today: दुनिया भर में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है, लेकिन भारत में इसका असर थोड़ा अलग रहा. वैश्विक बाजारों में गोल्ड 24% तक टूट गया, जबकि भारतीय बाजार में इसमें केवल 20% की ही गिरावट आई है. आइए जानते हैं कि इस 4% के अंतर के पीछे मुख्य वजहें क्या हैं.

वैश्विक बाजारों में सोने की कीमतों में 24% की भारी गिरावट आई है, जबकि भारत में यह गिरावट 20% तक ही सीमित रही. इसकी मुख्य वजह भारत सरकार द्वारा इम्पोर्ट ड्यूटी को 6% से बढ़ाकर 15% करना और डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना है, जिसके कारण घरेलू स्तर पर सोने की कीमतें वैश्विक स्तर जितनी नहीं गिर पाईं.

सोने की कीमतों में अंतर: वैश्विक बाजार बनाम भारत

वैश्विक स्तर पर सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुका है. शुक्रवार को स्पॉट गोल्ड की कीमत 4,068.71 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई, जो 29 जनवरी 2026 के 5,379 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर से लगभग 24% कम है. इस बड़ी गिरावट के कारण सोना ‘बेयर मार्केट’ में प्रवेश कर चुका है.

भारत में कीमतों की स्थिति

दूसरी ओर, ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, दिल्ली में धनतेरस के दिन शुद्ध सोना (99.9%) 1,46,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ. 29 जनवरी को यह 1,83,000 रुपये के ऑल-टाइम हाई पर था, जिसके हिसाब से भारत में कीमतों में लगभग 20% की ही गिरावट दर्ज की गई है.

टैक्स नीतियों का असर (इम्पोर्ट ड्यूटी)

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश सोना विदेशों से आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अलावा, इस पर लगने वाले टैक्स भी कीमतें तय करते हैं. जनवरी में जब कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर थीं, तब आयात शुल्क 6% था. सरकार ने 13 मई को इसे बढ़ाकर प्रभावी रूप से 15% (10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर सेस) कर दिया. इस 9% के टैक्स हाइक ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की मंदी के असर को घरेलू बाजार में काफी हद तक दबा दिया.

कमजोर होता रुपया

सोने की कीमतें डॉलर में तय होती हैं. 29 जनवरी को रुपया डॉलर के मुकाबले 92 के अपने सबसे निचले स्तर के आसपास था. कमजोर रुपये के कारण भारतीय आयातकों को विदेश से सोना खरीदने के लिए अधिक रुपये चुकाने पड़े, जिसने घरेलू स्तर पर सोने को और ज्यादा गिरने से रोक लिया.

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-भारत एक्सप्रेस 



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