Lychee Varieties: मुजफ्फरपुर की लीची अब सिर्फ शाही और चाइना तक सीमित नहीं रहने वाली. आने वाले समय में यहां के किसानों और लीची प्रेमियों को तीन नई किस्मों का स्वाद भी चखने को मिलेगा. खास बात ये है कि ये नई प्रजातियां देर से तैयार होती हैं, यानी अब लीची का सीजन पहले से ज्यादा लंबा चलेगा. जून से लेकर जुलाई के मध्य तक बाजार में ताजा लीची मिलने की उम्मीद है.
राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुशहरी ने करीब पांच साल की रिसर्च के बाद गंडकी संपदा, गंडकी योगिता और गंडकी लालिमा नाम की तीन नई प्रजातियां विकसित की हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि बदलते मौसम और बाजार की जरूरत को देखते हुए इन किस्मों पर काम किया गया है, ताकि किसानों को ज्यादा समय तक कमाई का मौका मिल सके.
किसानों के लिए क्यों फायदेमंद हैं ये नई किस्में?
अब तक मुजफ्फरपुर में शाही लीची का सीजन मई के आखिर से शुरू होकर करीब दो हफ्ते चलता था. उसके बाद कुछ दिनों तक चाइना लीची बाजार में रहती थी. यानी किसानों के पास बिक्री का समय सीमित था. लेकिन नई किस्मों के आने से लीची का कारोबार जुलाई तक खिंच सकता है.
इसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा. जब बाजार में लीची ज्यादा दिनों तक उपलब्ध रहेगी तो उन्हें जल्दबाजी में कम दाम पर फल बेचने की मजबूरी नहीं होगी. साथ ही अलग-अलग समय पर फसल तैयार होने से मजदूरी और सप्लाई का दबाव भी कम रहेगा.
जल्दी खराब नहीं होगी लीची
नई प्रजातियों की एक बड़ी खासियत इनका मोटा छिलका है. रिसर्च सेंटर से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक शाही और चाइना लीची की तुलना में इनका छिलका ज्यादा मजबूत है, जिससे फल जल्दी खराब नहीं होता.
यानी अब किसानों को ट्रांसपोर्ट और स्टोरेज में भी राहत मिल सकती है. दूर-दराज के बाजारों तक लीची भेजना आसान होगा और नुकसान कम होगा. उपभोक्ताओं के लिए भी फायदा यह है कि बाजार से खरीदी गई लीची थोड़ी ज्यादा देर तक ताजा रह सकेगी.
क्या है गंडकी संपदा लीची?
गंडकी संपदा प्रजाति का फल आकार में बड़ा माना जा रहा है. एक लीची का वजन करीब 35 से 42 ग्राम तक पहुंचता है. इसका गूदा सफेद, मुलायम और काफी रसीला होता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक एक पेड़ से 120 से 140 किलो तक उत्पादन मिल सकता है. इस किस्म की खास बात यह भी है कि इसमें फल फटने की समस्या कम देखी गई है. पल्प रिकवरी 80 से 85 प्रतिशत तक बताई जा रही है यानी खाने लायक हिस्सा ज्यादा मिलेगा.
गंडकी योगिता को स्वाद के मामले में खास माना जा रहा है. इसमें मिठास और सुगंध दोनों ज्यादा विकसित की गई हैं. इसके पेड़ आकार में छोटे होते हैं, जिससे देखभाल आसान हो सकती है. यह जुलाई के मध्य में पकती है और एक पेड़ से 70 से 80 किलो तक उत्पादन मिलने की बात कही गई है. जो किसान छोटे क्षेत्र में बागवानी करना चाहते हैं, उनके लिए यह प्रजाति उपयोगी साबित हो सकती है.
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गंडकी लालिमा भी बनेगी पसंद
गंडकी लालिमा प्रजाति जून के मध्य में तैयार हो जाती है. इसका फल 28 से 32 ग्राम तक का होता है. एक पेड़ से 130 से 140 किलो तक उत्पादन मिलने की संभावना बताई गई है. इसका गूदा नरम और रसदार है, इसलिए बाजार में इसकी मांग बढ़ सकती है.
उपभोक्ताओं को क्या फायदा होगा?
इन नई किस्मों का फायदा सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं रहेगा. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा तो आम लोगों को भी ज्यादा समय तक ताजी लीची खाने को मिलेगी. बाजार में सप्लाई बढ़ने से कीमतों में भी कुछ हद तक संतुलन आ सकता है.
साथ ही मोटे छिलके और ज्यादा टिकाऊपन की वजह से ऑनलाइन डिलीवरी और दूसरे राज्यों में सप्लाई का रास्ता भी आसान होगा. आने वाले वर्षों में मुजफ्फरपुर की लीची देश के बड़े बाजारों में और मजबूती से अपनी पहचान बना सकती है.
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-भारत एकसप्रेस
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