अगर आप प्राइवेट सेक्टर में नौकरी करते हैं और अपनी अप्रैल महीने की सैलरी स्लिप का इंतजार कर रहे हैं, तो आपके लिए एक बड़ी खबर है. केंद्र सरकार के नए लेबर कोड (New Labour Code) के नियमों के लागू होने के बाद अब कर्मचारियों के हाथ में आने वाली तनख्वाह (In-hand Salary) का स्ट्रक्चर पूरी तरह बदल गया है. इस बदलाव का सीधा असर आपकी हर महीने मिलने वाली रकम पर पड़ेगा, जो अब पहले के मुकाबले कुछ कम होकर आएगी. हालांकि, इसका एक दूसरा पहलू भी है जो आपके भविष्य के लिए फायदेमंद साबित होगा.
क्या है नया नियम और क्यों कम होगी सैलरी?
नए नियमों के अनुसार, अब किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) उसकी कुल सीटीसी (CTC) का कम से कम 50% होना अनिवार्य है. पहले कंपनियां स्मार्ट तरीके से बेसिक सैलरी को कम रखती थीं और भत्तों (HRA, कन्वेयंस, मेडिकल आदि) को बढ़ाकर दिखाती थीं. इससे फायदा यह होता था कि पीएफ (PF) की कटौती कम होती थी और हाथ में पैसे ज्यादा आते थे.
लेकिन अब नियम बदल गया है. अगर आपकी बेसिक सैलरी कुल वेतन का आधा होगी, तो आपका पीएफ योगदान भी बढ़ जाएगा. पीएफ बेसिक सैलरी का 12% कटता है, इसलिए जब बेसिक बढ़ेगी, तो पीएफ की कटौती भी ज्यादा होगी और सीधे तौर पर आपके हाथ में आने वाली ‘नेट सैलरी’ कम हो जाएगी.
जेब पर क्या होगा असर?
आइए इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिए आपकी कुल सैलरी 50,000 रुपये है.
पुराना हिसाब: पहले आपकी बेसिक सैलरी मान लीजिए 20,000 रुपये थी. इस पर 12% पीएफ यानी 2,400 रुपये कटते थे और आपको हाथ में 47,600 रुपये मिलते थे.
नया हिसाब: नए नियम के तहत अब कंपनी को आपकी बेसिक सैलरी कम से कम 25,000 रुपये करनी होगी. अब पीएफ भी इस 25,000 पर कटेगा. यानी अब 2,400 के बजाय 3,000 रुपये पीएफ के कटेंगे. इस तरह आपकी इन-हैंड सैलरी 47,000 रुपये रह जाएगी. यानी आपकी जेब से हर महीने 600 रुपये कम हो जाएंगे.
किसे लगेगा झटका?
सरकार ने इस नियम में एक छोटा सा पेंच रखा है. यह बदलाव उन कर्मचारियों पर अनिवार्य रूप से लागू होगा जिनकी बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से अधिक है. अगर किसी की बेसिक सैलरी 15,000 रुपये या उससे कम है, तो उनके सैलरी स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव की संभावना कम है और उनकी इन-हैंड सैलरी पर असर नहीं पड़ेगा. लेकिन जो लोग 20,000, 30,000 या उससे ज्यादा की बेसिक पे पा रहे हैं, उन्हें अप्रैल से अपनी सैलरी स्लिप में कटौती स्पष्ट नजर आएगी.
भविष्य के लिए फायदे का सौदा
भले ही आपकी इन-हैंड सैलरी में 600 या 1000 रुपये की कमी आए, लेकिन लॉन्ग टर्म में यह आपके लिए मुनाफे का सौदा है. पीएफ की कटौती बढ़ने का मतलब है कि आपके रिटायरमेंट फंड में ज्यादा पैसा जमा हो रहा है, जिस पर सरकार तगड़ा ब्याज भी देती है. इसके अलावा, बेसिक सैलरी बढ़ने से आपकी ग्रेच्युटी की रकम में भी बड़ा इजाफा होगा. सरल शब्दों में कहें तो आज की थोड़ी सी कटौती, आपके कल के भविष्य को और भी सुरक्षित बना देगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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