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उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सरकार का बड़ा झटका: सालाना सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर की 4, जानें अब कितनी जेब होगी ढीली

PMUY Subsidy New Rules: सरकार ने सालाना सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या 9 से घटाकर 4 की. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी की बढ़ती कीमतों के बीच ऑयल कंपनियों के नुकसान को कम करने के लिए यह कदम उठाया गया है.

PMUY Subsidy New Rules

 PMUY Subsidy New Rules: मोदी सरकार की सबसे लोकप्रिय योजनाओं में से एक ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ (PMUY) के लाभार्थियों को एक बड़ा झटका लगा है. सरकार ने सालाना मिलने वाले सब्सिडी वाले कुकिंग गैस सिलेंडरों के कोटे में भारी कटौती करने का फैसला किया है (Ujjwala Yojana Cylinder Limit).

केंद्र सरकार ने अपनी प्रमुख ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ (PMUY) के लाभार्थियों को मिलने वाले सालाना सब्सिडी वाले कुकिंग गैस सिलेंडरों की संख्या घटाकर चार कर दी है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी प्रवीण मल खनूजा ने बताया कि यह कदम उज्ज्वला परिवारों की औसत सालाना खपत के हिसाब से मदद को सही स्तर पर लाने के लिए उठाया गया है.

गौरतलब है कि मई 2016 में शुरू हुई इस योजना के तहत शुरुआत में साल के 12 सिलेंडर मिलते थे, जिसे पिछले साल घटाकर 9 और अब केवल 4 कर दिया गया है.

एलपीजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी

यह कटौती ऐसे समय पर हुई है जब अंतरराष्ट्रीय कारणों से एलपीजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत पिछले तीन महीनों में दो बार बढ़कर 942 रुपये हो चुकी है. हालांकि, उज्ज्वला लाभार्थियों को इस पर 300 रुपये की लक्षित (Targeted) सब्सिडी मिलती रहेगी, जिससे उन्हें यह सिलेंडर 642 रुपये का पड़ेगा.

सरकार के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक सिलेंडर की असल सप्लाई कॉस्ट लगभग 1,600 रुपये बैठती है, जिसमें से करीब 1,000 रुपये की मदद सरकार और तेल कंपनियां मिलकर उठा रही हैं.

एलपीजी की कीमतों में भारी उछाल  (LPG Cylinder Price Delhi)

मंत्रालय के मुताबिक, फरवरी के आखिर में पश्चिम एशिया में तनाव और युद्ध शुरू होने के बाद वैश्विक स्तर पर एलपीजी की कीमतों में भारी उछाल आया है. भारत में एलपीजी के आयात की लागत सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) से तय होती है, जिसमें हाल के महीनों में 46% तक की बढ़ोतरी देखी गई है. होर्मुज जलडमरूमध्य में आई रुकावटों के कारण खाड़ी देशों से सप्लाई बेहद कम हो गई है, जिससे घरेलू स्तर पर लागत लगातार बढ़ रही है.

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सरकार ने साल 2022 से अब तक 52,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम सब्सिडी दी है. इसके बावजूद, तेल कंपनियों को हर एलपीजी सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है. केवल गैस ही नहीं, बल्कि पेट्रोल पर 6 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 30 रुपये प्रति लीटर का नुकसान (Under-recovery) कंपनियां झेल रही हैं.

इसी घाटे की भरपाई के लिए हाल ही में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹7.50, कुकिंग गैस में ₹29 और सीएनजी में ₹6 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई है.

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-भारत एकसप्रेस 



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