इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि दहेज उत्पीड़न के आरोप में कानूनी प्रक्रिया का दुरूपयोग पति के रिश्तेदारों को परेशान करने के लिए नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने कहा पति के रिश्तेदार होने के नाते किसी को ट्रायल के लिए नहीं घसीटा जा सकता,जबतक कि दहेज मांगने के आरोप में विशेष घटना का जिक्र न किया गया हो.
कोर्ट ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 319के तहत नन्द ननदोई को जारी सम्मन व पुनरीक्षण अर्जी निरस्त करने के दोनों आदेश रद कर दिया और कहा कि याचीगण के खिलाफ आरोप सामान्य प्रकृति के है. उनके खिलाफ ऐसे साक्ष्य नहीं है जिनके आधार पर सजा दी जा सके. कोर्ट ने कहा ट्रायल ने बिना सबूत सम्मन जारी कर गलती की और पुनरीक्षण अदालत ने अर्जी निरस्त कर अनियमितता बरती. कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए सम्मन आदेश 19अक्टूबर 15व पुनरीक्षण अर्जी खारिज करने के आदेश 18अक्टूबर को रद कर दिया है.
यह आदेश न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार ने अलीगढ़ के सुनील कुमार व तीन अन्य की याचिका पर दिया है.
ट्रायल में सम्मन जारी करना गलत
याचिका पर अधिवक्ता सैयद वाजिद अली ने बहस की. इनका कहना था कि शिकायतकर्ता विपक्षी की शादी 19अप्रैल 2007को हुई थी. पारिवारिक विवाद को लेकर पति के परिवार व रिश्तेदारों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के आरोप में 9दिसंबर 10को अलीगढ़ के इगलास थाने में एफआईआर दर्ज की गई. दहेज में आल्टो कार न देने पर उत्पीड़न का आरोप लगाया गया. राज्य बनाम पवन कुमार व अन्य का आपराधिक केस चल रहा. पत्नी की तरफ से दाखिल धारा 319की अर्जी पर याची रिश्तेदारों को सम्मन जारी किया गया. जिसके खिलाफ पुनरीक्षण अर्जी भी खारिज कर दी गई तो हाईकोर्ट में यह याचिका दायर कर जारी सम्मन आदेश को कानूनी प्रक्रिया का दुरूपयोग मानते हुए रद करने की मांग की गई.
याची का कहना है कि उनके खिलाफ आरोप सामान्य व वेग है. जिसमें किसी घटना का जिक्र नहीं है. केवल दबाव डालने के लिए परिवार व रिश्तेदारों को परेशान करने की कार्यवाही है.याची अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के तमाम फैसलों का जिक्र किया और कहा कि रिश्तेदारों को अनर्गल आरोप में ट्रायल के लिए नहीं बुलाया जा सकता.
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भारत एक्सप्रेस
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