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अयोध्या में कोरियन क्वीन की प्रतिमा, क्या है 2000 साल पुराना कनेक्शन?

अयोध्या के सरयू तट पर दक्षिण कोरिया की महारानी हू की 10 फिट ऊंची प्रतिमा का अनावरण हुआ. यह पार्क भारत-कोरिया के अटूट रिश्तों का नया प्रतीक है.

रिपोर्ट- मनमीत गुप्ता


अयोध्या के सरयू तट पर स्थित ‘कोरियाई क्वीन हू पार्क’ में एक ऐतिहासिक पल देखने को मिला. यहां दक्षिण कोरिया की महारानी हू की 10 फिट ऊंची कांस्य प्रतिमा का अनावरण अयोध्या के महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने किया. यह प्रतिमा सिर्फ एक मूर्ति नहीं, बल्कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच 2000 साल पुराने भावनात्मक और पारिवारिक रिश्तों का प्रतीक है.

कौन थी राजकुमारी सुरीरत्ना?

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि लगभग 2 हजार साल पहले (48 ईस्वी में) अयोध्या की राजकुमारी सुरीरत्ना ने करीब 4400 किलोमीटर की लंबी और चुनौतीपूर्ण समुद्री यात्रा की थी. वह समुद्र के रास्ते दक्षिण कोरिया के ‘गया’ राज्य पहुंचीं. वहां उनकी मुलाकात राजा किम सूरो से हुई, जिसके बाद दोनों का विवाह हुआ. विवाह के बाद राजकुमारी सुरीरत्ना को वहां ‘रानी हू ह्वांग ओक’ के नाम से जाना गया.

कोरिया का ‘करक राजवंश’ और अयोध्या का नाता

राजा किम सूरो और रानी हू ने मिलकर वहां ‘करक राजवंश’ की नींव रखी. आज के समय में दक्षिण कोरिया की लगभग 60 लाख आबादी खुद को इसी राजवंश का हिस्सा और रानी हू का वंशज मानती है. यही वजह है कि कोरिया के लोग अयोध्या को अपना ‘ननिहाल’ मानते हैं. इस ऐतिहासिक घटना का जिक्र कोरिया के प्राचीन ग्रंथ ‘साम गुक यूसा’ में भी मिलता है.

पार्क की इंचार्ज नीलम ने बताया कि रानी हू की यह प्रतिमा बेहद खास है. इसे कोरिया में ही वहां की विशेष ‘कोरियन मेटल’ धातु से बनाया गया है. इसका वजन लगभग 1300 किलोग्राम है और इसे पानी के जहाज के जरिए कोरिया से भारत लाया गया है. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने इस पार्क को खास तौर पर रानी हू की याद में विकसित किया है.

पर्यटकों के लिए बनेगा ‘कोरियन विलेज’

आने वाले समय में यह पार्क अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा. चीफ कॉर्डिनेटर वंदना शर्मा के मुताबिक, यहां भारतीय और कोरियन सभ्यता का मिलन दिखेगा. पार्क में कोरियन स्टोर, कोरियन रेस्टोरेंट और कोरियन थीम पर आधारित एक पूरा गांव (कोरियन विलेज) बसाया जाएगा. यहां आने वाले लोग कोरियन व्यंजनों का स्वाद भी ले सकेंगे.

सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को मिलेगी मजबूती

अयोध्या के पूर्व राजा स्वर्गीय विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र ने साल 1999-2000 के आसपास कोरियाई लोगों के साथ इन संबंधों को पुनर्जीवित करने की पहल की थी. अब इस प्रतिमा के अनावरण से ना केवल दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंध प्रगाढ़ होंगे, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक रिश्तों को भी नई गति मिलेगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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