सदियों का इंतजार खत्म कर, अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो गया है. 25 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंदिर के 161 फुट ऊंचे शिखर पर धर्म ध्वजा फहराए जाने के साथ ही, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मंदिर के मुख्य ढांचे के निर्माण की औपचारिक पूर्णता की घोषणा कर दी है. यह ऐतिहासिक पल भगवान राम और माता सीता के विवाह पंचमी के शुभ अवसर पर अभिजीत मुहूर्त में आया, जिसे संपूर्ण देश ने आस्था और उल्लास के साथ देखा. इस बीच, राम मंदिर को दान देने वाले भक्तों की सूची भी चर्चा में है, जिसमें अब तक ₹5,500 करोड़ से भी ज्यादा की रिकॉर्ड राशि प्राप्त हो चुकी है.
धर्म ध्वजारोहण का भव्य और ऐतिहासिक समारोह
25 नवंबर 2025 को अयोध्या में धर्म ध्वजारोहण का भव्य समारोह आयोजित किया गया. श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को पहले ही हो चुकी थी, लेकिन मंदिर के पूर्ण निर्माण के प्रतीक के रूप में ध्वजारोहण को महत्वपूर्ण माना गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विशेष अवसर पर मंदिर के शिखर पर 22 फुट लंबा और 11 फुट चौड़ा केसरिया ध्वज फहराया.

छह छोटे मंदिरों का निर्माण कार्य भी पूरा हो चुका
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार, मुख्य राम मंदिर के साथ-साथ परिसर में भगवान शिव, गणेश, हनुमान, सूर्य, भगवती, अन्नपूर्णा और शेषावतार को समर्पित छह छोटे मंदिरों का निर्माण कार्य भी पूरा हो चुका है. ध्वज पर ‘ॐ’, सूर्यदेव और कोविदार वृक्ष (जो भगवान राम के इक्ष्वाकु वंश का प्रतीक है) के चिन्ह अंकित हैं, जो सनातन धर्म की विजय और राम के शौर्य का प्रतीक हैं. यह ध्वजारोहण इस बात का प्रमाण है कि मुख्य राम मंदिर अब पूर्ण रूप से बनकर तैयार है.

₹5,500 करोड़ का रिकॉर्ड दान, मोरारी बापू टॉप पर
राम मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश के राम भक्तों ने दिल खोलकर दान किया है, जिसकी कुल राशि ₹5,500 करोड़ से भी ज्यादा हो चुकी है. यह राशि मंदिर निर्माण की भव्यता में भक्तों के अटूट विश्वास को दर्शाती है.
सबसे बड़े दानदाता: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वेबसाइट (https://srjbtkshetra.org/) और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आध्यात्मिक गुरु मोरारी बापू ने मंदिर निर्माण के लिए सबसे बड़ा व्यक्तिगत योगदान दिया है.
मोरारी बापू: उन्होंने व्यक्तिगत रूप से 11.3 करोड़ रुपये दान दिए. इसके अलावा, अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में उनके अनुयायियों ने 8 करोड़ रुपये का अतिरिक्त दान दिया, जिससे उनकी कुल दान राशि 18.6 करोड़ रुपये हो गई.
कई अन्य दानदाताओं ने भी बड़े योगदान दिए, जिनमें सूरत के प्रसिद्ध हीरा कारोबारी दिलीप कुमार वी लाखी और उनके परिवार द्वारा दान किया गया 11 किलो सोना शामिल है, जिसकी मार्केट कीमत लगभग ₹68 करोड़ बताई जाती है. इसका उपयोग मंदिर के दरवाजे, गर्भगृह और पिलर्स की सजावट में किया गया है. इसके अलावा, मुकेश अंबानी ने 2.51 करोड़ रुपये और गुजरात के गोविंद भाई ढोकलिया ने 11 करोड़ रुपये का दान दिया.

मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने क्या बताया?
राम मंदिर को दान के रूप में अब तक ₹5,500 करोड़ से भी ज्यादा मिल चुके हैं. हालांकि, मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने अक्टूबर 2025 में बताया था कि अब तक ₹3,000 करोड़ से अधिक का दान प्राप्त हुआ है, जिसमें से लगभग ₹1,500 करोड़ खर्च हो चुके हैं. चूंकि ट्रस्ट एक पारदर्शी प्रक्रिया का पालन करता है और दान में लगातार वृद्धि हो रही है, ₹5,500 करोड़ की राशि भक्तों के कुल योगदान के रूप में लगातार चर्चा में है, जैसा कि मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है. दान की प्रक्रिया को कानूनी रूप से आयकर अधिनियम की धारा 80G के तहत छूट प्राप्त है.

राम मंदिर परिसर की विशेषताएं- जानिए क्यों है यह खास?
राम मंदिर परिसर को न केवल एक धार्मिक स्थल के रूप में, बल्कि एक सांस्कृतिक और वास्तुशिल्प चमत्कार के रूप में भी विकसित किया गया है.
वास्तुशिल्प: मंदिर पारंपरिक नागर शैली में निर्मित है. इसकी लंबाई 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट और ऊंचाई 161 फीट है. यह तीन मंजिला मंदिर है, जिसमें कुल 392 खंभे और 44 दरवाजे हैं. मंदिर की संरचना में लोहे का उपयोग बिल्कुल नहीं किया गया है, और इसकी अनुमानित आयु 2,500 वर्ष है. यह पूरी तरह से भूकंपरोधी संरचना है.
निर्माण सामग्री: गर्भगृह के निर्माण में शालिग्राम शिलाओं का उपयोग किया गया है. दरवाजों को सागौन की लकड़ी से बनाकर उन पर सोने की परत चढ़ाई गई है.
70 एकड़ का हरित क्षेत्र: 70 एकड़ के विशाल परिसर का लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र हरा-भरा रहेगा. परिसर के चारों ओर आयताकार ‘परकोटा’ बनाया गया है.
अन्य मंदिर और स्थल: परिसर में मुख्य मंदिर के अलावा छह छोटे मंदिर, सीता कूप (पौराणिक कुआँ) और नवरत्न कुबेर पहाड़ी पर एक प्राचीन शिव मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है. इसके अतिरिक्त, महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, निषादराज और माता शबरी जैसे महान व्यक्तित्वों को समर्पित सप्त मंडप भी बनकर तैयार हैं.

वे काम, जो अभी पूरे होने बाकी हैं
राम मंदिर का निर्माण पूरा हो गया है, हालांकि, अभी परिसर को पूर्ण रूप से तैयार करने में अभी कुछ समय लगेगा.
चहारदीवारी: 3.5 से 4 किलोमीटर लंबी ‘परकोटा’ (चारदीवारी) का निर्माण अभी शेष है, जिसे अगले वर्ष (2026) के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है.
अतिरिक्त सुविधाएं: 500 लोगों की क्षमता वाला सभागार (ऑडिटोरियम), ट्रस्ट कार्यालय और गेस्ट हाउस का निर्माण भी जारी है.
द्वितीय तल: मंदिर के द्वितीय तल पर विभिन्न भाषाओं में रचित रामायण और पांडुलिपियां संग्रहीत की जाएंगी.
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