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चोरी पकड़ी फिर भी ‘चुप’ क्यों? चंपत राय पर उठे सवाल, ट्रस्ट की बैठक में एक-एक खुले सारे पत्ते

Ram Mandir Donation Case: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद में FIR दर्ज करने में कथित देरी को लेकर ट्रस्ट की बैठक में कई सवाल उठे. साथ ही चंपत राय की भूमिका पर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे है. पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर मामले की जांच तेज कर रही है.

Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ियों का मामला अब जांच के अहम दौर में पहुंच चुका है. पुलिस का मानना है कि सिर्फ दस्तावेजों के आधार पर पूरी सच्चाई सामने नहीं आएगी. इसलिए इस मामले में जेल में बंद तीन आरोपियों अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय को रिमांड पर लेकर उनसे आमने-सामने पूछताछ की जा रही है. जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इस प्रक्रिया से कई ऐसे तथ्य सामने आ सकते हैं, जो अब तक स्पष्ट नहीं हो पाए हैं.

पहले क्यों नहीं हुई कार्रवाई?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही बनकर उभरा है कि जब कथित चोरी की जानकारी शुरुआती दिनों में ही मिल गई थी, तब तत्काल कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई. बताया जा रहा है कि तत्कालीन महासचिव चंपत राय को 5 जून को ही चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की सूचना मिल गई थी.

जानकारी के मुताबिक पुलिस की मदद से कथित तौर पर चोरी की गई रकम भी बरामद कर ली गई थी. इसके बावजूद उसी समय एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई. अब यही फैसला पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू बन गया है और जांच का केंद्र भी.

ट्रस्ट की बैठक में भी उठा यही मुद्दा

हाल ही में हुई ट्रस्ट की बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा हुई. माना जा रहा था कि चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार होने के बाद विवाद धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा, लेकिन बैठक के दौरान हुई बातचीत ने कई नए सवाल खड़े कर दिए.

बैठक में मौजूद कई सदस्यों ने इस बात पर चिंता जताई कि यदि शुरुआत में ही पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी जाती, तो मामला इतना लंबा नहीं खिंचता और कानूनी प्रक्रिया समय पर शुरू हो जाती. उनका मानना था कि शुरुआती स्तर पर उठाए गए कदम इस विवाद को काफी हद तक सीमित रख सकते थे.

अखिलेश यादव के बयान के बाद बढ़ा मामला

बताया जा रहा है कि 7 जून को समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने जब इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाया, तब यह मामला तेजी से चर्चा में आया. इसके बाद राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और चढ़ावे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे. राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह मामला सिर्फ कथित चोरी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ट्रस्ट के प्रशासनिक फैसलों और जिम्मेदारियों पर भी बहस शुरू हो गई.

FIR क्यों नहीं कराई?

राम मंदिर निर्माण और प्राण-प्रतिष्ठा के बाद चंपत राय की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख चेहरा बन चुकी थी. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बाद उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. ट्रस्ट की बैठक में यह मुद्दा भी सामने आया कि कथित तलाशी और रकम की बरामदगी किस अधिकार के तहत कराई गई. साथ ही यह भी पूछा गया कि यदि चोरी का संदेह था और रकम बरामद हो चुकी थी, तो फिर तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराने में देरी क्यों की गई.


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जिम्मेदारियों की भी होगी जांच

बैठक के दौरान ट्रस्ट पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों पर भी गंभीर चर्चा हुई. सदस्यों का कहना था कि चढ़ावे की सुरक्षा, उसकी गिनती और निगरानी की जिम्मेदारी ट्रस्ट की ही थी. ऐसे में यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि किसी पदाधिकारी ने अपने दायित्वों का सही तरीके से पालन नहीं किया, तो उनके खिलाफ भी कानूनी जिम्मेदारी तय की जा सकती है.

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि पूछताछ और जांच के बाद क्या नए तथ्य सामने आते हैं. यह मामला केवल कथित चोरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, जवाबदेही और निर्णय लेने की प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.

-भारत एक्सप्रेस



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