पवन सेंगर, भारत एक्सप्रेस
अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितता के मामले में एक बहुत बड़ी कानूनी कार्रवाई सामने आई है. सूत्रों के मुताबिक, विशेष जांच दल (SIT) की विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में आधिकारिक तौर पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है. उत्तर प्रदेश सरकार के सख्त निर्देश पर हुई इस कार्रवाई के बाद अयोध्या से लेकर लखनऊ तक प्रशासनिक और धार्मिक गलियारों में हड़कंप मच गया है.
चढ़ावे के हेरफेर में 8 लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
राम मंदिर परिसर में चढ़ावे की राशि में हेरफेर करने के इस गंभीर मामले में कुल 8 लोगों को नामजद करते हुए प्राथमिकी दर्ज की गई है. यह एफआईआर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य कृष्ण मोहन की लिखित तहरीर (शिकायत) के आधार पर अयोध्या के स्थानीय थाने में दर्ज की गई है. ट्रस्ट की ओर से दी गई शिकायत में उन सभी संदिग्धों की भूमिका का स्पष्ट उल्लेख किया गया है, जो मंदिर के दान और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े हुए थे.
SIT ने जांच रिपोर्ट में चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव समेत 17 लोगों को आरोपी माना था. आज श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (SRJBTK) ने जिन लोगों के विरुद्ध FIR दर्ज कराई है, उनमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम नहीं है. हालांकि, उनके सहयोगी टिन्नू यादव का नाम है.
भारतीय न्याय संहिता (BNS) और PC Act की गंभीर धाराएं
यूपी सरकार के कड़े रुख को देखते हुए पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बेहद सख्त कानूनी शिकंजा कसा है. यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306, 316, 317, 317(4), 317(5) और धारा 61 के तहत दर्ज की गई है. इसके साथ ही मामले की संवेदनशीलता और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को देखते हुए इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act – PC Act) की गंभीर धाराओं को भी जोड़ा गया है.
आपको बता दें कि राम मंदिर के चढ़ावे में विसंगतियां सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था. एसआईटी ने मंदिर के खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच की. जांच रिपोर्ट में मंदिर के चढ़ावे की चोरी में कुछ कर्मचारियों और बाहरी लोगों की मिलीभगत के पुख्ता सबूत पाए गए.
एसआईटी की इसी रिपोर्ट को आधार बनाकर मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर तुरंत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया गया. फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां इस घोटाले की गहराई तक पहुंचने और चोरी की गई रकम की बरामदगी के लिए आरोपियों से पूछताछ की तैयारी कर रही हैं.
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