सरोजिनी नगर के भाजपा विधायक राजेश्वर सिंह
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लोकप्रिय विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने अवैध घुसपैठ की समस्या को लेकर आवाज उठाई है. उन्होंने अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा, रोजगार, जनसंख्या संतुलन और सांस्कृतिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरे के रूप में रेखांकित किया.
डॉ. राजेश्वर सिंह के अनुसार, गृह मंत्रालय के आंकड़ों के आधार पर 1997 में 1 करोड़, 2004 में 1.2 करोड़, और 2016 में 2 करोड़ अवैध बांग्लादेशी भारत में थे, और अब यह संख्या अनुमान से कहीं अधिक हो सकती है. इस समस्या से निपटने के लिए उन्होंने छह बिंदुओं का सुझाव भी दिया है.
"अवैध घुसपैठ अब मात्र सुरक्षा संकट नहीं बल्कि रोज़गार, जनसंख्या संतुलन व सांस्कृतिक स्थिरता पर सीधा हमला है!!
गृह मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि, वर्ष 1997 तक देश में 1 करोड़ अवैध बांग्लादेशी, वर्ष 2004 तक 1.2 करोड़ तथा वर्ष 2016 तक 2 करोड़ अवैध बांग्लादेशी थे!
अब देश में अवैध…
— Rajeshwar Singh (@RajeshwarS73) June 11, 2025
डॉ. राजेश्वर सिंह ने 6 महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर कार्य किये जाने की आवश्यकता जताई-
- पहला, विदेशी नागरिक अधिनियम 1946 में संशोधन कर समयबद्ध निर्वासन प्रक्रिया लागू करना और जिला मजिस्ट्रेट को निर्वासन आदेश देने का अधिकार देना.
- दूसरा, विशेष इमिग्रेशन ट्रिब्यूनल्स बनाकर फास्ट ट्रैक न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करना.
- तीसरा, राष्ट्रीय पहचान तंत्र विकसित कर एनआरसी/एनपीआर को आधार और मोबाइल डेटा से जोड़ना.
- चौथा, सीमावर्ती राज्यों में डिटेंशन सेंटर और पुलिस को जांच का अधिकार देना.
- पांचवां, ‘नेशनल इमिग्रेशन कंट्रोल एक्ट’ लागू कर आर्टिकल 21 के दुरुपयोग को रोकना. छठा, बार-बार याचिकाओं और स्टे पर रोक लगाकर केवल विशेष मानवीय मामलों में न्यायालय हस्तक्षेप की व्यवस्था करना.
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पाकिस्तान ने एक साल में 8 लाख अफगानों को वापस भेजा, जबकि भारत में कानूनी जड़ता के कारण संप्रभुता पर समझौता हो रहा है. डॉ. राजेश्वर सिंह ने केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को पत्र लिखकर इन सुधारों की मांग की है, ताकि अवैध घुसपैठियों का तेज और तय समय पर निर्वासन हो सके.
सिंह के इस कदम को सोशल मीडिया पर व्यापक समर्थन मिल रहा है. बहुत-से सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी मांगों को तत्काल लागू करने की वकालत की है. यह मुद्दा देशहित और संविधान के अनुरूप नीति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



