Caste Dispute: उत्तर प्रदेश में जातिगत भेदभाव की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. इटावा में हुई जातीय हिंसा की तपिश अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि झांसी से एक और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों और सामाजिक सोच को कठघरे में खड़ा कर दिया है.
झांसी के रक्सा थाना क्षेत्र के बसाई गांव में एक नवविवाहित जोड़े का रिश्ता सिर्फ इसलिए टूट गया क्योंकि लड़की की जाति वैसी नहीं थी जैसी बताई गई थी.
दुल्हे के परिवार ने शादी को स्वीकारने से किया इनकार
ये घटना बीते शुक्रवार (27 जून) की है, जब धर्मेन्द्र राजपूत नाम के युवक की शादी पूरे रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई. शादी की रस्में निभाई गईं, फेरे हुए, और परिवारजनों ने मिलकर नए रिश्ते का स्वागत किया.
हालांकि, दोनों परिवारों में ये खुशी का यह माहौल अगले ही दिन मातम में बदल गया. कारण सिर्फ इतना था कि दुल्हन लोधी समाज की नहीं, बल्कि यादव जाति से निकली.
दूल्हे के परिजनों को लड़की के बारे में बताया गया था कि वह लोधी समाज से है. लेकिन शादी के बाद जब दुल्हन का भाई शराब के नशे में धुत होकर बोला, “हम यादव हैं,” तो पूरा माहौल बदल गया.
इतना सुनने के बाद दुल्हे के घर में हड़कंप मच गया और परिवार ने इस शादी को स्वीकारने से साफ इनकार कर दिया. बहू ने खाना-पीना छोड़ दिया और मामला रक्सा थाने तक पहुंच गया.
आपसी सहमति के बाद तोड़ दिया रिश्ता
थाने में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई और आपसी सहमति से यह रिश्ता तोड़ दिया गया. कानून की नजर में यह एक आपसी सहमति थी, लेकिन समाज की नजर में यह घटना एक बड़ी सोच पर सवाल उठा गई.
अब सवाल ये उठता है कि क्या आज भी जाति, इंसानियत और रिश्तों से बड़ी है? यह कोई पहली घटना नहीं है. इसी हफ्ते इटावा में भी जातिगत विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था, जिसमें कई लोग घायल हुए थे और इलाके में तनाव का माहौल बना रहा.
-भारत एक्सप्रेस
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