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दिल्ली NCR में मजदूरों का चक्काजाम प्रदर्शन: गुरुग्राम से लेकर नोएडा और बुलंदशहर तक कैसे भड़की आंदोलन की आग?

एक हफ्ते में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक आंदोलन में बदला, गोलीकांड के बाद मजदूर सड़कों पर उतर आए. नोएडा-गाजियाबाद बॉर्डर जाम, 900 फैक्ट्रियों में काम ठप-पूरे NCR की रफ्तार थमी..

Delhi NCR labour protest 2026: दिल्ली-एनसीआर के औद्योगिक हब में पिछले एक हफ्ते से कोहराम मचा है. दरअसल जो आंदोलन 7 अप्रैल को गुरुग्राम (मानेसर) की गलियों से शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हुआ था, वह अब नोएडा के सेक्टरों और गाजियाबाद के बॉर्डरों पर ‘आर-पार’ की जंग में तब्दील हो चुका है. 12 अप्रैल को हुए एक गोलीकांड ने जलती आग में घी का काम किया, जिसके बाद सोमवार को हजारों की तादाद में मजदूर सड़कों पर उतर आए और पूरे दिल्ली-एनसीआर की रफ्तार को ब्रेक (Delhi NCR protest) लगा दिया.

टाइमलाइन: कब-क्या और कैसे हुआ?

7 अप्रैल (गुरुग्राम): मानेसर इलाके से वेतन वृद्धि और सुविधाओं की मांग को लेकर चिंगारी उठी.

9-11 अप्रैल (नोएडा): आंदोलन नोएडा के फेस-2 ‘होजरी कॉम्प्लेक्स’ पहुँचा. तीन दिनों तक प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन प्रशासन और कंपनियों की चुप्पी ने मजदूरों का सब्र तोड़ दिया.

12 अप्रैल (ग्रेटर नोएडा): टर्निंग पॉइंट! इकोटेक थर्ड इलाके में मिंडा कंपनी के पास प्रदर्शन के दौरान गोली चली. एक महिला मजदूर को गोली लगने की खबर ने पूरे एनसीआर के मजदूरों को एकजुट और उग्र कर दिया.

13 अप्रैल (आज): सुबह से ही नोएडा फेस-2, सेक्टर-62 और NH-9 पर हजारों मजदूरों का कब्जा हो गया. आगजनी, तोड़फोड़ और पुलिस के आंसू गैस के गोलों के बीच पूरा इलाका ‘रणक्षेत्र’ बन गया.

क्यों अड़े हैं मजदूर? ये हैं वो 6 प्रमुख मांगें

मजदूरों का साफ कहना है कि इस कमरतोड़ महंगाई में पुराने वेतन पर काम करना नामुमकिन है. उनकी मांगें इस प्रकार हैं:

न्यूनतम वेतन: 26,000 रुपये प्रति माह किया जाए.

ओवरटाइम: काम की दोगुनी दर से भुगतान मिले.

छुट्टी और स्लिप: साप्ताहिक अवकाश फिक्स हो और हर महीने सैलरी स्लिप दी जाए.

बोनस: समय पर सीधे बैंक खाते में क्रेडिट हो.

समय पर भुगतान: वेतन के लिए महीनों का इंतजार न करना पड़े.

जाम का झाम: नोएडा-गाजियाबाद बॉर्डर ‘लॉक’

आज के प्रदर्शन का सबसे बुरा असर आम जनता पर पड़ा है. नोएडा-गाजियाबाद बॉर्डर पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिसमें एम्बुलेंस तक फंसी रहीं. चिल्ला बॉर्डर, डीएनडी, सेक्टर-62 और एनएच-24 जैसे व्यस्त मार्गों पर गाड़ियों का पहिया पूरी तरह थम गया. ट्रैफिक पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर रूट डायवर्जन लागू किया है, लेकिन अंदरूनी रास्तों पर भी लोड बढ़ने से दफ्तर जाने वाले लोग घंटों फंसे रहे.

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900 फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप

इस आंदोलन ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक ढांचे को हिलाकर रख दिया है.

फेस-2 होजरी कॉम्प्लेक्स: यहाँ की करीब 500 कंपनियों में काम पूरी तरह बंद है.

इकोटेक थर्ड: यहाँ की 400 से अधिक फैक्ट्रियों को सुरक्षा कारणों से काम रोकना पड़ा है.

उत्पादन ठप होने से न केवल करोड़ों का नुकसान हो रहा है, बल्कि निवेशकों के बीच भी डर का माहौल है. अब इस आंदोलन की आंच बुलंदशहर, हापुड़ और गाजियाबाद के इंडस्ट्रियल एरिया तक पहुँच गई है, जिससे आने वाले दिन और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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