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हिंदी की महत्ता: डॉ. दिनेश शर्मा बोले- अंग्रेजी मानसिकता देश और समाज के लिए खतरनाक, बच्चों को संस्कार देना जरूरी

डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि अंग्रेजी मानसिकता समाज और देश के लिए खतरनाक है. बच्चों को अपनी मातृभाषा का ज्ञान और संस्कार देने चाहिए. उन्होंने कुंभ की महिमा और हिंदी के महत्व पर भी चर्चा की.

डॉ. दिनेश शर्मा ने हिंदी की महत्ता पर की चर्चा, बोले- अंग्रेजी मानसिकता समाज और देश के लिए खतरनाक

डॉ. दिनेश शर्मा

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Dr. Dinesh Sharma Speech: उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा ने हाल ही में मुदाफरा (हापुड) में आयोजित विश्व हिंदी मंच के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार व्यक्त किए. उन्होंने खासतौर पर अंग्रेजी मानसिकता पर चिंता जताई और कहा कि यह समाज और देश के लिए खतरनाक हो सकती है.

विदेशी देशों की प्रगति और भाषा का महत्व

डॉ. शर्मा ने जापान, जर्मनी, रूस और चीन जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों ने अपनी राष्ट्रीय भाषाओं को महत्व दिया है, जिसके कारण वे प्रौद्योगिकी, विज्ञान, और समाजिक विकास में अग्रणी हैं. उन्होंने कहा कि “हमारे देश को भी अपनी भाषा को प्राथमिकता देनी चाहिए.” इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदी भाषा के प्रयोग के लिए क्रांति की जरूरत है और यह केवल बच्चों में संस्कार डालने के माध्यम से संभव है.

बच्चों को मोबाइल देने से बेहतर संस्कार देना

डॉ. शर्मा ने बच्चों की शिक्षा पर भी गहरा विचार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि आजकल बच्चों को मोबाइल दे दिए जाते हैं, जिससे वे कुसंस्कार सीखते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अगर बच्चों को सही संस्कार दिए जाएं, तो वे जीवनभर अच्छे व्यक्ति बन सकते हैं. “अगर संस्कार नहीं दिए गए तो भविष्य में जीवन पर रोना पड़ेगा,” डॉ. शर्मा ने कहा.

उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को रानी लक्ष्मीबाई और महाराणा प्रताप जैसी प्रेरणादायक कहानियाँ सुनाई जानी चाहिए, जो उन्हें राष्ट्रीयता और संस्कृति के प्रति जागरूक करें.

अंग्रेजी स्कूलों पर डॉ. शर्मा के विचार

डॉ. शर्मा ने अंग्रेजी स्कूलों के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अगर बच्चों के अंदर अंग्रेजी मानसिकता आ जाती है तो समाज और परिवार पर इसका विपरीत असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि “हिंदी भाषा संस्कारों की भाषा है क्योंकि यह संस्कृत से निकली है, और यही कारण है कि हिंदी में शिक्षा दी जानी चाहिए.”

कुंभ की महिमा और विदेशी शोध

डॉ. शर्मा ने कुंभ मेला के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की. उन्होंने कहा कि इस साल कुंभ मेला में आठ करोड़ से अधिक लोग पहुंच चुके हैं, और 29 जनवरी तक दस करोड़ लोग आने की संभावना है. उन्होंने यह भी बताया कि विदेशी शोधकर्ता कुंभ मेले में आ रही भीड़ पर अध्ययन कर रहे हैं, क्योंकि यह उनके लिए एक आश्चर्य का विषय है.

उन्होंने विपक्षी नेताओं पर भी तंज करते हुए कहा कि कुछ लोग कुंभ में भीड़ न होने की बात करते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि मोदी सरकार ने हजारों रेलगाड़ियां और लाखों बसें चलवाई हैं, जिससे कुंभ में आने जाने की सुविधा पूरी तरह से सुनिश्चित की गई है.

संस्कृतियों को बनाए रखना जरूरी

डॉ. शर्मा ने अंत में यह कहा कि हिंदी भाषा के उन्नयन के साथ-साथ भारतीय संस्कृति को जीवंत बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए. उन्होंने हिंदी को राष्ट्र भाषा की ओर बढ़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की.

इस कार्यक्रम में हिंदी भाषा और संस्कृति के महत्व को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया और सभी उपस्थित जनसमूह को प्रेरित किया गया कि वे अपने बच्चों में संस्कार और देशभक्ति की भावना विकसित करें. कार्यक्रम में भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेश तोमर, पूर्व सांसद प्रदीप चौधरी, विधायक हरेंद्र तेवतिया, और अन्य प्रमुख नेता भी उपस्थित रहे.



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