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उत्तराखंड सरकार वर्ष 2027 में प्रस्तावित अर्धकुंभ मेले को देखते हुए हरिद्वार क्षेत्र में गंगा घाटों की पवित्रता और व्यवस्था को लेकर बड़े फैसलों पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसी क्रम में हरिद्वार के गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर सख्त नियम लागू करने का प्रस्ताव चर्चा में है। सरकार हरिद्वार के लगभग 120 वर्ग किलोमीटर में फैले 105 प्रमुख गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की संभावनाओं का अध्ययन कर रही है।

नासिक-त्र्यम्बकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला 2027-28: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "सिंहस्थ कुंभ 2027 के आयोजन में 13 अखाड़े भाग लेंगे. पहला शाही स्नान 2 अगस्त 2027 को होगा. गोदावरी की सफाई और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया जाएगा."

श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि त्र्यंबकेश्वर महादेव मंदिर की बहुत अधिक मान्यता है, यहां पूजा-अर्चना करने से सभी कष्ट दूर होते हैं. यह बारह ज्‍योर्तीलींग मे से एक है और इसमें मंदिर के गर्भ गृह में शिव जी का पिंड है.

प्रयागराज महाकुंभ की दिव्यता और भव्यता से प्रयागवासियों की ठाठ हो गई है. प्रयागराज के निखरने, संवरने, चमकने की चर्चा खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तमाम मंचों पर कर रहे हैं.

महाकुंभ 2025 के बाद भी त्रिवेणी संगम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. प्रशासन संगम क्षेत्र को नव्य स्वरूप देने के लिए बुनियादी सुविधाओं और पर्यटन विकास की नई योजना पर काम कर रहा है.

महाकुंभ का समापन श्रद्धा और संस्कृति की यादें छोड़ गया संगम की लहरों में आरती की गूंज बाकी है स्वच्छता कर्मियों का योगदान सराहनीय रहा, गंगा-यमुना की निर्मलता बनाए रखने का संकल्प लिया गया

सीएम योगी ने महाकुंभ को वैश्विक इवेंट बनाने में मीडिया की भूमिका को सराहा. प्रयागराज में मीडिया संवाद के दौरान उन्होंने सकारात्मक रिपोर्टिंग के लिए धन्यवाद दिया और आयोजन की सफलता को रेखांकित किया.

प्रयागराज महाकुंभ-2025 का महाशिवरात्रि को अंतिम दिन है, आज सुबह से लाखों श्रद्धालुओं के आगमन, उनके जोश और श्रद्धा के साथ ही धार्मिक मेले के अंतिम दिन का आगाज हो गया है. 26 फरवरी को महाशिवरात्रि पर अंतिम स्नान होगा.

प्रयागराज में चल रहा महाकुंभ समाप्त होने की कगार पर है, लेकिन इस पर राजनीति अभी जारी है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने संगम के पानी को पीने योग्य बताया, जिस पर अखिलेश यादव ने सवाल उठाए.

वैज्ञानिक डॉ. अजय सोनकर के शोध में सिद्ध हुआ कि 57 करोड़ श्रद्धालुओं के स्नान के बाद भी गंगा जल की शुद्धता बरकरार है. बैक्टीरियोफेज की उपस्थिति के कारण इसमें कोई बैक्टीरियल वृद्धि नहीं हुई.