Ghaziabad daughter organ donation story
Ghaziabad daughter organ donation story: गाजियाबाद के मोरटा गांव से सामने आई एक ऐसी कहानी ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं, जहां बेटियों ने अपने पिता की जिंदगी बचाने के लिए त्याग और प्यार की मिसाल पेश की है. 45 वर्षीय जयंत त्यागी की गंभीर बीमारी के बाद उनके परिवार पर मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ा था. लेकिन उनकी दो बेटियों ने अपने फैसले से यह साबित कर दिया कि बेटियां किसी भी बेटे से कम नहीं होतीं.
बेटियों ने बचाई पिता की जान
जयंत त्यागी की 22 वर्षीय बेटी रिषिका त्यागी ने अपने पिता की जान बचाने के लिए अपने लिवर का एक हिस्सा दान किया, जबकि 19 वर्षीय बेटी खुशी त्यागी ने अपनी किडनी देकर पिता को नई जिंदगी देने की कोशिश की. दोनों बेटियों का कहना था कि उनके लिए दुनिया में सबसे जरूरी उनके पिता हैं. अगर पिता ही साथ नहीं रहेंगे तो बाकी सारी खुशियां और सपने अधूरे रह जाएंगे. परिवार के लिए यह फैसला आसान नहीं था. बेटियों के सामने अपनी जिंदगी और भविष्य को लेकर कई सवाल थे, लेकिन पिता के प्यार के आगे हर डर छोटा पड़ गया. दोनों बेटियों ने हिम्मत दिखाई और मेडिकल प्रक्रिया पूरी कर अपने पिता के जीवन को बचाने का संकल्प लिया.
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पिता के बिना सब अर्थहीन है- बेटियां
रिषिका और खुशी का कहना है कि पिता ने हमेशा उनके लिए अपना जीवन समर्पित किया है. बचपन से लेकर आज तक उन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया. ऐसे में जब पिता को उनकी जरूरत थी, तो बेटियों ने भी अपना फर्ज निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी. मोरटा गांव में दोनों बेटियों के इस साहस की चर्चा हो रही है. लोग इसे सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि बेटी के उस प्रेम की मिसाल बता रहे हैं जो रिश्तों की हर सीमा से ऊपर होता है. जयंत त्यागी के लिए उनकी बेटियां अब सिर्फ बेटियां नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी उम्मीद बन चुकी हैं.
भारत एक्सप्रेस
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