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48 करोड़ की ज़मीन खाली! बिलासपुर में अवैध प्लॉटिंग पर चला प्राधिकरण का बुलडोजर

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बिलासपुर में 24,120 वर्गमीटर सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया है.

ग्रेटर नोएडा में अवैध अतिक्रमण और बिना अनुमति के की जा रही प्लॉटिंग के खिलाफ प्राधिकरण ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है. बुधवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की टीम ने बिलासपुर इलाके में कार्रवाई करते हुए करीब 24,120 वर्गमीटर सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराया. इस जमीन की अनुमानित कीमत करीब 48 करोड़ रुपये बताई जा रही है.

बताया गया है कि बिलासपुर के खसरा नंबर 1554 की इस जमीन पर कुछ कॉलोनाइजर कथित तौर पर अवैध तरीके से प्लॉट काटकर कॉलोनी बसाने की तैयारी कर रहे थे. शिकायत मिलने के बाद प्राधिकरण ने मामले की जांच की और इसके बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई.

भारी पुलिस बल के बीच चला बुलडोजर

कार्रवाई के दौरान मौके पर प्राधिकरण के अधिकारियों के साथ पर्याप्त पुलिस बल भी मौजूद रहा. टीम ने बुलडोजर की मदद से अवैध निर्माण और कब्जे को हटाया. कार्रवाई के समय वरिष्ठ प्रबंधक नागेंद्र सिंह समेत कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे. अधिकारियों के मुताबिक, सरकारी और अधिसूचित जमीन पर किसी भी तरह का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा.

प्राधिकरण के प्रोजेक्ट विभाग के जीएम ए.के. सिंह ने कहा कि इस तरह के अभियान आगे भी जारी रहेंगे. उनका कहना है कि जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा करने या बिना अनुमति प्लॉटिंग करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

प्लॉट खरीदने से पहले जांच जरूरी

प्राधिकरण ने आम लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है. अधिकारियों ने कहा कि किसी भी जमीन या प्लॉट को खरीदने से पहले उसके दस्तावेज और संबंधित खसरा नंबर की जानकारी जरूर जांच लें. इसके लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मित्रा ऐप की मदद ली जा सकती है.

दरअसल, सस्ते प्लॉट और बेहतर भविष्य का सपना दिखाकर कई बार लोग अवैध कॉलोनाइजरों के जाल में फंस जाते हैं. बाद में जमीन के स्वामित्व, नक्शे की मंजूरी या निर्माण की वैधता को लेकर परेशानी खड़ी हो सकती है. ऐसे में खरीदारी से पहले जमीन की स्थिति की आधिकारिक तौर पर जांच करना बेहद जरूरी है.

प्राधिकरण ने यह भी साफ किया है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट में किसानों की जमीन पर विकसित की जा रही कथित अवैध कॉलोनियों के खिलाफ भी जल्द कार्रवाई की जाएगी. अधिकारियों के मुताबिक, ऐसे मामलों की निगरानी की जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जाएगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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