Lucknow Teen Pregnancy: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अब टीनएज लड़के-लड़कियां बहुत जल्दी सेक्सुअली एक्टिव हो रहे हैं. बिना सेफ्टी के बनाए गए रिश्तों की वजह से कई टीनएजर्स STD (सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज) के शिकार हो रहे हैं.
ये प्रॉब्लम सिर्फ अनमैरिड वर्किंग युवाओं में ही नहीं, बल्कि स्कूल और कॉलेज जाने वाली लड़कियों में भी देखने को मिल रही है.
Lucknow Teen Pregnancy के आ रहे सैकड़ों मामले
लखनऊ के चार बड़े सरकारी अस्पतालों में हर महीने 100 से ज्यादा ऐसे केस सामने आ रहे हैं. जहां कम उम्र में बनाए गए सेक्सुअल रिलेशन की वजह से लड़कियों को गंभीर इनफेक्शन और दूसरी सेहत संबंधी दिक्कतें हो रही हैं.
ये तो सिर्फ सरकारी अस्पताल के आंकड़े हैं. प्राइवेट अस्पतालों में भी ऐसी ही समस्याएं देखने को मिल रही हैं. जहां टीनएज लड़के-लड़कियां अपनी समस्याएं लेकर पहुंच रहे हैं.
KGMU अस्पताल में Teen Pregnancy के 20 मामले
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार लखनऊ के KGMU अस्पताल में हर महीने 15 से 20 मामले ऐसे सामने आ रहे हैं, जिसमें टीनएजर लड़के-लड़कियां अनवांटेड प्रेगनेंसी या यौन इन्फेक्शन जैसी परेशानियों से जूझ रहे हैं. जहां इनका इलाज और काउंसिलिंग की जा रही है.
अनमैरिड गर्ल्स खुलकर जाहिर कर रही इच्छाएं
KGMU की स्त्री रोग विशेषज्ञ विभाग की प्रमुख प्रोफेसर अंजू अग्रवाल का कहना है कि, आज कल के युवा पहले के मुकाबले ज्यादा वोकल हो गए हैं. जहां पहले अनमैरिड गर्ल्स शादी से पहले सेक्स जैसी बातों को खुलकर एक्सेप्ट नहीं करती थीं. वहीं अब की लड़कियां खुलकर इसे जाहिर कर रही हैं.
अनसेफ संबंध बनाने से टीनएज लड़कियां हो रही प्रेगनेंट
प्रो. अग्रवाल का कहना है कि टीनएज में लड़कियां अनसेफ संबंध बनाने की वजह से प्रेगनेंट हो रही हैं. इसके अलावा इनफेक्शन जैसे खतरों का भी सामना कर रही हैं. जिसकी वजह से उन्हें अबॉर्शन कराना पड़ रहा है.
स्कूल और कॉलेज जाने वाले युवा हैं अधिकतर शिकार
वहीं लखनऊ के अवंती बाई महिला अस्पताल में भी हर महीने भारी संख्या में टीनएजर्स डॉक्टरों से मिलकर अपनी समस्याएं बता रहे हैं. इसमें ज्यादातर स्कूल और कॉलेज के युवा हैं. अस्पताल में लगातार आ रहे ऐसे मामले और उनकी परेशानियों को देखकर इस क्षेत्र के एक्सपर्ट्स की चिंतित हो रहे हैं.
इनफेक्शन जैसी परेशानियों से जूझ रहे युवा
झलकारी बाई महिला अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. ऊषा यादव ने बताया कि उनके यहां हर महीने औसतन 15 टीनएजर्स पहुंच रहे हैं. जो सेक्सुअली एक्टिव होने के कारण इनफेक्शन और अन्य मेडिकल परेशानियों से जूझ रहे होते हैं.
इनमें कुछ युवाओं में सुसाइडल टेंडेंसी, डिप्रेशन और कॉन्फिडेंस की कमी जैसी समस्याएं भी देखने को मिल रही हैं. इनमें से ज्यादातर को सेफ इंटरकोर्स की आधी-अधूरी जानकारी रहती है. इसकी वजह से ये लोग डेंजर जोन में हैं. उन्हें यहां पर ट्रीटमेंट और काउंसिलिंग दोनों दी जा रही है.
– भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



