Terrorist Arrested In Kashmir: जम्मू कश्मीर पुलिस और जांच एजेंसियों ने पाकिस्तान संचालित एक टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है. पुलिस ने पूछताछ के लिए 10 लोगों को हिरासत में लिया है. काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर CIK को छापेमारी में एक खास एन्क्रिप्टेड ऐप मिला, जिसका इस्तेमाल आतंकी अपने आकाओं से बातचीत, पैसे भेजने और हमले की प्लानिंग के लिए कर रहे थे.
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार जम्मू कश्मीर पुलिस की छापेमारी में गिरफ्तार ये संदिग्ध जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के लिए काम कर रहे थे. जिसे पाकिस्तान के रावलपिंडी से जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर अब्दुल्ला गाजी ऑपरेट करता है.
अब्दुल्ला गाजी कर रहा आतंकियों की भर्ती
एजेंसियों को जांच में पता चला है कि अब्दुल्ला गाजी लगातार स्थानीय कश्मीरी युवाओं के साथ संपर्क में था और उन्हें जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा में भर्ती होने के लिए कट्टरपंथी बना रहा था.
पुलिस के द्वारा 10 स्थानों पर की गई छापेमारी का उद्वेश्य पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी संगठनों के स्लीपर सेल और भर्ती मॉड्यूल को खत्म करना था.
एन्क्रिप्टेड ऐप्स की मदद से Terrorist कर रहे थे संपर्क
पुलिस को छापेमारी के दौरान कई, दस्तावेज, मोबाइल और डिजिटल उपकरण मिले हैं. इसके अलावा एजेंसियों को एक ऐसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स के बारे में पता चला है. जिनका उपयोग गिरफ्तार संदिग्ध पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से संपर्क बनाने के लिए करते थे.
जम्मू-कश्मीर पुलिस और जांच एजेंसियों की इस कार्रवाई में एक और चीज उजागर हुई है. वो है ‘साइबर जिहाद’. इसकी मदद से पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी संगठन, भारत के युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए तरह-तरह के एनक्रिप्टेड ऐप्स और कई ऐसी चीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं. जिनसे उन्हें भारत सरकार के प्रति भड़काया जा सके.
क्या होते हैं स्लीपर सेल?
स्लीपर सेल वो व्यक्ति होते हैं जो आतंकियों के व्यक्ति होते हैं और अपने काम को अंजाम देने के लिए आम समाज में घुल-मिल जाते हैं. वो बिना कोई वारदात को अंजाम दिये दशकों निकाल सकते हैं. ऐसे लोग अपने आकाओं के इशारे पर आतंकी वारदातों को अंजाम देना, आतंकियों को मदद पहुंचाना या आतंकी सामग्री को पहुंचाना जैसे गतिविधियों में शामिल होते हैं.
भारतीय एजेंसियों को मिली बड़ी कामयाबी (Terrorist arrested in Kashmir)
काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) के द्वारा ध्वस्त किया गया ये 5वां बड़ा डिजिटल टेरर मॉड्यूल है. जिसका इस्तेमाल जैश-ए-मोहम्मद भारत के युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और आतंकवादी समूहों में भर्ती करने के लिए करता था.
– भारत एक्सप्रेस
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