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अलमारी के पीछे ‘मौत’ का सामान! पढ़ाई की आड़ में हथियार सप्लाई करता था कॉलेज स्टूडेंट, ऐसे हुआ भंडाफोड़

मेरठ में पुलिस ने एक घर के अंदर चल रही अवैध मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है, जहां अलमारी के नीचे बने गुप्त तहखाने में तमंचे बनाए जा रहे थे.

मेरठ से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पुलिस के साथ आम लोगों को भी हैरान कर दिया है. यहां एक साधारण से घर के अंदर छिपकर अवैध हथियार बनाने का पूरा सेटअप चल रहा था. इस पूरे नेटवर्क में एक 19 साल का कॉलेज छात्र भी शामिल था, जो पढ़ाई के साथ-साथ हथियारों की सप्लाई करता था.

पुलिस को इस गुप्त फैक्ट्री की भनक लगी, जिसके बाद थाना इंचौली पुलिस और स्वाट टीम ने मिलकर खरदौनी इलाके में छापा मारा. जब टीम अंदर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर सभी दंग रह गए. एक कमरे में रखी अलमारी के नीचे छिपा तहखाना ही इस अवैध फैक्ट्री का असली ठिकाना था, जहां देसी तमंचे तैयार किए जा रहे थे.

व्हाट्सऐप से होती थी डील

इस गिरोह का काम करने का तरीका भी बेहद चालाकी भरा था. ग्राहकों से सीधा संपर्क व्हाट्सऐप के जरिए किया जाता था. पहले हथियारों की फोटो और वीडियो भेजी जाती थी, फिर कीमत तय होती थी और ऑर्डर मिलने पर डिलीवरी कर दी जाती थी. यानी पूरा कारोबार डिजिटल तरीके से संभाला जा रहा था, जिससे किसी को शक नहीं हो.

गैंग का मास्टरमाइंड पुराना खिलाड़ी

पुलिस ने मौके से चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें इस गिरोह का सरगना इमरान भी शामिल है. पुलिस के अनुसार, इमरान पहले भी अवैध हथियार बनाने के मामले में जेल जा चुका है. कुछ समय शांत रहने के बाद उसने फिर से अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया और इस बार और भी ज्यादा गुप्त तरीके से काम शुरू किया.

पढ़ाई के साथ ‘डिलीवरी बॉय’ बना छात्र

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बीसीए का छात्र उमंग ठाकुर भी इस गिरोह का हिस्सा था. उसकी भूमिका डिलीवरी बॉय जैसी थी यानी तैयार हथियार ग्राहकों तक पहुंचाना था. एक तरफ वह कॉलेज की पढ़ाई कर रहा था, वहीं दूसरी तरफ इस अवैध काम में भी सक्रिय था.

हर सदस्य की तय थी जिम्मेदारी

गिरोह में हर व्यक्ति का काम बंटा हुआ था. इमरान हथियार बनाता था, कुलदीप सप्लाई संभालता था, नरेंद्र नए ग्राहकों को जोड़ता था, और उमंग डिलीवरी करता था. इस तरह पूरा नेटवर्क एक संगठित सिस्टम की तरह काम कर रहा था.

पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में हथियार और उन्हें बनाने के उपकरण बरामद किए हैं. एसपी देहात अभिजीत कुमार सिंह के मुताबिक, यह गिरोह काफी समय से सक्रिय था. फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस नेटवर्क के तार और कहां-कहां जुड़ा हुआ हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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