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बांके बिहारी मंदिर परिसर में क्यों घुस गई NSG? लाइटें बंद, 5 घंटे थमीं रहीं वृंदावन की सांसे

मथुरा के वृंदावन में बुधवार की रात अचानक उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब हथियारों से लैस NSG कमांडो बांके बिहारी मंदिर परिसर में दाखिल हुए. लाइटें बंद कर दी गईं और गलियों को खाली करा लिया गया.

Banke Bihari Temple

Banke Bihari Temple Mock Drill: राकेश पचौरी/मथुरा:  वृंदावन की गलियां आमतौर पर ‘बांके बिहारी लाल की जय’ के जयकारों से गूंजती हैं, लेकिन बुधवार की रात करीब 10 बजे वहां का नजारा कुछ अलग और काफी चौंकाने वाला था. अचानक काले लिबास में हथियारों से लैस NSG (नेशनल सिक्योरिटी गार्ड) के कमांडो मंदिर परिसर और उसके आसपास की गलियों में नजर आने लगे. देखते ही देखते मंदिर के आसपास की लाइटें बंद कर दी गईं और वहां मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने का काम शुरू हुआ.

दहशत की रात

जैसे ही कमांडो ने मोर्चा संभाला, पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया. मंदिर के आसपास रहने वाले लोग और देर रात दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालु कुछ समझ नहीं पा रहे थे. मंदिर की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों के साथ जब भारी तादाद में कमांडो दिखे, तो अफवाहों का बाजार गर्म हो गया. कुछ देर के लिए तो ऐसा लगा जैसे कोई बड़ी अप्रिय घटना होने वाली है.

आतंकी हमले और सुरक्षा का ‘रियलिटी चेक’

करीब 5 घंटे तक चले इस भारी तनाव के बाद प्रशासन ने राहत की खबर दी. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह कोई वास्तविक आतंकी हमला या खतरा नहीं था, बल्कि एक मॉक ड्रिल थी. इसका सीधा मकसद यह जांचना था कि अगर कभी खुदा-न-खास्ता कोई आपात स्थिति या आतंकी घटना हो जाए, तो हमारी सुरक्षा एजेंसियां कितनी तैयार हैं.

बता दें कि इस अभ्यास के दौरान कमांडो ने संदिग्धों को कैसे काबू करे, घनी गलियों और भारी भीड़ के बीच लोगों को सुरक्षित कैसे निकाला जाए और स्थानीय पुलिस व NSG के बीच तालमेल कैसे बेहतर हो जैसे पहलुओं पर काम किया.

बांके बिहारी मंदिर: सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौती

बांके बिहारी मंदिर में रोजाना हजारों और त्योहारों पर लाखों की भीड़ जुटती है. वृंदावन की संकरी गलियां और श्रद्धालुओं का भारी दबाव प्रशासन के लिए हमेशा एक सिरदर्द बना रहता है. ऐसे में किसी भी अप्रत्याशित घटना से निपटने के लिए इस तरह के अभ्यास बेहद जरूरी हो जाते हैं.

बता दें कि प्रशासन का कहना है कि यह पूरी कवायद सुबह करीब 3 बजे तक चली. कमांडो ने मंदिर के चप्पे-चप्पे को खंगाला और आपातकालीन निकास मार्गों की समीक्षा की. भले ही इस मॉक ड्रिल से थोड़ी देर के लिए स्थानीय लोगों में डर बैठ गया था, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद कामयाब रही.

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-भारत एक्सप्रेस



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