Braj Ki Holi 2026: मथुरा में होली की एक खूबसूरत तस्वीर शनिवार को महावन के रमणरेती आश्रम में देखने को मिली. शनिवार का दिन रमणरेती आश्रम के लिए किसी उत्सव से कम नहीं था. सुबह से ही देश-दुनिया के कोने से श्रद्धालु अपने आराध्य के साथ होली खेलने के लिए जमा होने लगे थे. हर किसी के चेहरे पर एक ही खुशी थी. जैसे ही ठाकुरजी का आंगन खुला, अबीर और गुलाल की ऐसी आंधी उठी कि पूरा परिसर सतरंगी हो गया.
मंदिर के मंच पर जब कलाकारों ने ‘होली रास’ की प्रस्तुति शुरू की, तो वहां मौजूद संतों और भक्तों को आनंदित कर दिया. ब्रज के पारंपरिक होली गीतों और रसियाओं की धुन पर जब लठामार होली का मंचन हुआ, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. कलाकारों ने अपनी कला से द्वापर युग की उस जीवंत होली की याद दिला दी, जिसे देखने के लिए देवता भी तरसते हैं.
फूलों की होली और जयकारों की गूंज
रोमांच तो तब आया जब फूलों की होली शुरू हुई. जिस पल का भक्तों को घंटों से इंतजार था, वो घड़ी आते ही चारों तरफ बस ‘ठाकुर रमण बिहारी लाल की जय’ और ‘राधे-राधे’ के जयकारे सुनाई देने लगे. गेंदे, गुलाब और टेसू के फूलों की पंखुड़ियों से पूरा आंगन पट गया.
सिर्फ फूल ही नहीं, बल्कि केसर और चंदन से मिला हुआ सुगंधित रंग जब भक्तों पर बरसा, तो वे सुध-बुध खोकर नाचने लगे. राधा-कृष्ण के स्वरूपों ने जब एक-दूसरे पर गुलाल उड़ाया, तो ऐसा लगा कि साक्षात प्रिया-प्रियतम अपने भक्तों के बीच उतर आए हों.
रमणरेती की ये होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि श्रद्धा और विश्वास का सैलाब था.
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-भारत एक्सप्रेस
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