उत्तर प्रदेश में प्रयागराज मेले में हुई झड़प के बाद से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद वाला विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. पूरे देशभर में यह नाम विशेष चर्चा का विषय बने हुए हैं. अब हालिया उपक्रम में चर्चा में बने रहने के पीछे की वजह उन पर लगे बटुकों के यौन शोषण का आरोप है. इसी मामले में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका पर आज यानी 27 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है. आज कोर्ट में होने वाली इस सुनवाई से पहले अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बयान भी सामने आया है. इसमें उन्होंने कहा कि कोर्ट में हम अपना काम करेंगे और वो अपना काम करेंगे.
याचिका पर सुनवाई से पहले क्या बोले?
दरअसल जमानत याचिका पर सुनवाई से पहले मीडिया बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि न्यायालय के सामने अधिवक्तागण मौजूद हैं. लोगों को अपनी बात कहने का दायित्व है, लोग अपनी बात कहेंगे. बाकी न्यायालय के अपने विवेक पर है. उनकी तरफ से प्रयास किया ही जाएगा कि न्याय न मिले, यही होता है. स्वाभाविक है कि हम अपना काम करेंगे वो अपना काम करेंगे.
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क्या है पूरा मामला?
मामले की शुरुआत प्रयागराज के माघ मेले से जुड़ी बताई जा रही है. 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच विवाद हुआ था. इसके आठ दिन बाद, 24 जनवरी को जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की. शिकायत में माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों के साथ कथित यौन शोषण के आरोप लगाए गए.
पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दायर की गई. 13 फरवरी को दो नाबालिगों को कोर्ट में पेश किया गया और 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज हुए. कोर्ट के आदेश पर उसी दिन झूंसी थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई. एफआईआर में शंकराचार्य, उनके शिष्य मुकुंदानंद और 3 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है.
24 फरवरी को शंकराचार्य ने प्रयागराज के एडिशनल कमिश्नर अजय पाल शर्मा पर साजिश रचने का आरोप लगाया और इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की. इस याचिका पर आज यानी 27 फरवरी को सुनवाई होने की संभावना है.
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-भारत एक्सप्रेस
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