Bharat Express DD Free Dish
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital
Kanya Sumangla Mission Shakti Digital

कौशांबी में सवर्ण आर्मी जिलाध्यक्ष ने पीएम को खून से लिखा पत्र, UGC नीतियों पर जताई नाराजगी

UP News: कौशांबी जिले में सवर्ण आर्मी के जिलाध्यक्ष अभिषेक पांडेय ने UGC की नीतियों के खिलाफ पीएम मोदी को खून से पत्र लिखा. उन्होंने आरोप लगाया कि नई गाइडलाइन सामान्य वर्ग के छात्रों के हितों के खिलाफ है और चेतावनी दी कि आंदोलन और तेज होगा.

UP News: कौशांबी जिले में सवर्ण आर्मी के जिलाध्यक्ष अभिषेक पांडेय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नीतियों के खिलाफ बेहद अलग अंदाज में विरोध दर्ज कराया. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने खून से पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जताई.

सामान्य वर्ग के छात्रों के हितों पर सवाल

अभिषेक पांडेय का कहना है कि UGC द्वारा हाल ही में किए गए कुछ बदलाव सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए नुकसानदेह साबित होंगे. उनका आरोप है कि इन नीतियों से सवर्ण समाज के युवाओं के साथ भेदभाव होगा.

आंदोलन की चेतावनी

अपने पत्र में अभिषेक पांडेय ने साफ लिखा है कि अगर सरकार ने इस कथित अन्याय को रोकने के लिए कदम नहीं उठाए तो आंदोलन और भी तेज किया जाएगा. उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की है कि वे तुरंत हस्तक्षेप करें और UGC के विवादित निर्देशों को वापस लें.

शिक्षा और नियुक्तियों में समान अवसर की मांग

वहीं अभिषेक पांडेय ने कहा कि शिक्षा और नौकरी में सभी वर्गों को बराबरी का मौका मिलना चाहिए. उनका मानना है कि मौजूदा नीतियां सामान्य वर्ग के युवाओं को पीछे धकेल रही हैं, जिससे उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है.

सवर्ण आर्मी का रुख

सवर्ण आर्मी के जिलाध्यक्ष ने यह भी कहा कि संगठन युवाओं के अधिकारों की लड़ाई लड़ता रहेगा. उनका कहना है कि जब तक सरकार इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाती तब तक विरोध जारी रहेगा.

क्या है पूरा मामला?

नई गाइडलाइन के मुताबिक अब हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में एक इक्विटी कमेटी बनाना अनिवार्य होगा. इस कमेटी का काम होगा कि संस्थान में किसी भी छात्र या कर्मचारी के साथ भेदभाव की शिकायतों को देखना और यह सुनिश्चित करना कि किसी के साथ अनुचित व्यवहार न हो. इस समिति में एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग और महिला प्रतिनिधियों की मौजूदगी को सबसे अहम माना गया है.

क्यों बनाना पड़ा ऐसा नियम?

इन प्रावधानों का मसौदा पिछले साल फरवरी में सार्वजनिक किया गया था, जिसमें लोगों से सुझाव भी मांगे गए थे. यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद उठाया गया जब अदालत ने रोहित वेमुला और पायल तड़वी की माताओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए UGC को नए नियम बनाने के लिए कहा था. दरअसल, 2012 में बने नियम केवल कागजों तक सीमित रह गए थे और उनमें सक्रियता की कमी थी.

य भी पढ़ें-संसद में आज से ‘बजट संग्राम’: राष्ट्रपति के अभिभाषण से आगाज, इतिहास रचेंगी निर्मला सीतारमण; जानें पूरा शेड्यूल

इसके साथ ही हर उच्च शिक्षा संस्थान में एक इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर भी स्थापित किया जाएगा. इस केंद्र का उद्देश्य होगा कि वंचित और कमजोर वर्गों के छात्रों को पढ़ाई, फीस, सामाजिक सहयोग और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी मदद दी जा सके. यानी नए प्रावधानों के जरिए शिक्षा व्यवस्था को और अधिक समावेशी और न्यायपूर्ण बनाने की कोशिश की जा रही है.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Kanya Sumangla Mission Shakti Digital