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काशी में ‘पाकिस्तानेश्वर’ महादेव मंदिर का बदला नाम, सिंधी समाज के विरोध के बाद अब कहलाएंगे ‘सिंधु गंगेश्वर’

वाराणसी के छोटी शीतला घाट स्थित शिव मंदिर का नाम ‘पाकिस्तानेश्वर’ से बदलकर ‘सिंधु गंगेश्वर महादेव’ कर दिया गया है. सिंधी समाज की आपत्ति और पुलिस के दखल के बाद यह कदम उठाया गया.

Varanasi Pakistaneshwar Mahadev Temple Renamed Sindh Gangeshwar Mahadev

Pakistaneshwar Mahadev Mandir: धर्मनगरी काशी में शिव मंदिरों और घाटों की अपनी एक अलग ही सांस्कृतिक कहानी रही है, लेकिन हाल ही में छोटी शीतला घाट स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर का नाम अचानक विवादों में आ गया. मंदिर पर ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ लिखा बोर्ड देखकर स्थानीय लोगों और सिंधी समाज ने कड़ा विरोध जताया. इसके बाद जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस विवादित बोर्ड को तुरंत हटा दिया गया और अब मंदिर की नई पहचान ‘सिंधु गंगेश्वर महादेव मंदिर’ के रूप में तय की गई है.

सिंध प्रांत से जुड़ी है मंदिर की जड़ें

इस मंदिर की कहानी देश के विभाजन के दौर से गहराई से जुड़ी हुई है. 1947 में भारत-पाकिस्तान बंटवारे के वक्त पाकिस्तान के सिंध प्रांत से ताल्लुक रखने वाले और पूर्वी बंगाल के बोगड़ा शहर में बसे करीब 8 से 10 सिंधी परिवार अपनी जान बचाकर बनारस पहुंचे थे. ये परिवार अपने साथ एक पवित्र शिवलिंग भी लाए थे.

शुरुआत में परिवारों ने इसे रामघाट के पास गंगा में प्रवाहित करने की योजना बनाई थी, लेकिन स्थानीय लोगों के आग्रह पर वे रुक गए. इसके बाद बूंदी स्टेट की जमीन पर इस शिवलिंग को पूरे आदर के साथ स्थापित किया गया. सालों तक इसे ‘हिंदू-सिंधी महादेव’ के नाम से जाना जाता रहा.

अराजक तत्वों ने लगाया था विवादित बोर्ड

सिंधी समाज का आरोप है कि कुछ साल पहले कुछ अराजक तत्वों ने मंदिर पर ‘पाकिस्तानेश्वर महादेव’ का बोर्ड लगा दिया था, जिससे धीरे-धीरे यह विवादित नाम प्रचलन में आ गया. समाज का कहना है कि यह नाम उनकी ऐतिहासिक पहचान और काशी की गंगा-जमुनी तहजीब के बिल्कुल खिलाफ था. विवाद बढ़ने के बाद डीसीपी काशी के हस्तक्षेप से वह बोर्ड हटाया गया और 27 सितंबर को बैठक कर सर्वसम्मति से ‘सिंधु गंगेश्वर महादेव’ नाम तय किया गया.

सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने की तैयारी

अब इस नए नाम को आधिकारिक कागजातों में दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. 8 अक्टूबर को होने वाली नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में समाजवादी पार्टी के पार्षद राजकपूर चौधरी इस संबंध में एक औपचारिक प्रस्ताव पेश करेंगे. प्रस्ताव पारित होते ही यह नया और पवित्र नाम सरकारी अभिलेखों में दर्ज हो जाएगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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