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PM FME Scheme में भ्रष्टाचार, बैंकों–दलालों की मिलीभगत ?

सरकार रोजगार बढ़ाने और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं बनाती है… लेकिन इन्हीं योजनाओं को जमीन पर उतारने वाले ही अब इनको भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा रहे हैं। पीएम–FME योजना में ग्वालियर, भिंड और मुरैना जिलों में खेतों में सिर्फ टीन शेड लगाकर फर्जी यूनिटें खड़ी कर दी गईं। इन फर्जी यूनिटों पर करोड़ों के लोन और लाखों की सब्सिडी उठा ली गई। फर्जीवाड़ा केवल डेढ़ साल के भीतर हुआ। प्रदेशभर में 7000 से ज्यादा लाभार्थियों को 1 लाख करोड़ से ज्यादा का लोन दिया गया, जिन पर 250 करोड़ रुपए से अधिक की सब्सिडी जारी हुई। लेकिन इन सब्सिडी वाली यूनिटों में बड़ी संख्या फर्जी बताई जा रही है। किराना और कपड़े की दुकानों के कोटेशन लगाकर यूनिटें दिखा दी गईं। बैंक अधिकारियों और दलालों की मिलीभगत से लोन पास हो गया। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से भी आवेदन शासन तक भेजे गए। ग्वालियर में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की उप संचालक एमपीएस बुंदेला ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई है…

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