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देश की पहली महिला डॉक्टर: आनंदीबाई जोशी

आज देश की पहली महिला डॉक्टर आनंदीबाई जोशी की जयंती है. 19वीं सदी के रूढ़िवादी समाज की बेड़ियां तोड़कर अमेरिका से मेडिकल डिग्री लेने वाली आनंदीबाई की कहानी आंसू और साहस की मिसाल है.

India's First Female doctor Anandibai Joshi Biography and her struggles
Edited by Vaibhav Gupta

आज देश की पहली महिला डॉक्टर डॉ. आनंदीबाई जोशी ( Dr. Anandibai Joshi ) की जयंती है. उनका जन्म 31 मार्च 1865 को हुआ था. उन्होंने न सिर्फ भारतीय महिलाओं के लिए चिकित्सा क्षेत्र में दरवाजे खोले, बल्कि 19वीं सदी की रूढ़िवादी समाज में महिला शिक्षा और स्वावलंबन की मिसाल कायम की.

संघर्ष

आनंदीबाई का मूल नाम यशोदा था. मात्र 9 वर्ष की आयु में उनका विवाह गोपालराव जोशी नामक एक 29 वर्षीय व्यक्ति से कर दिया गया. उस वक्त की प्रथा के अनुसार बाल विवाह आम था, लेकिन गोपालराव जोशी प्रगतिशील विचारों वाले व्यक्ति थे. उन्होंने अपनी पत्नी को शिक्षा दिलाने का फैसला किया और उनका नाम आनंदीबाई रखा.

जब आनंदीबाई मात्र 14 वर्ष की थीं, तब उनके पहले बच्चे की मृत्यु हो गई. इस दुखद घटना ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया. उन्होंने महसूस किया कि यदि एक महिला डॉक्टर होती, तो शायद उनका बच्चा बचाया जा सकता था. इसी घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी. उन्होंने चिकित्सा की पढ़ाई करने का संकल्प लिया.

अमेरिका में चिकित्सा शिक्षा

19वीं सदी में भारतीय महिलाओं के लिए विदेश जाना या उच्च शिक्षा प्राप्त करना लगभग असंभव था. लेकिन आनंदीबाई ने हिम्मत नहीं हारी. गोपालराव जोशी की सहायता से वे 1883 में अमेरिका रवाना हुईं.

1886 में उन्होंने वुमेंस मेडिकल कॉलेज ऑफ पेनसिल्वेनिया (Women’s Medical College of Pennsylvania) से चिकित्सा की डिग्री प्राप्त की. वे अमेरिका की भूमि पर पढ़ने वाली पहली हिंदू महिला मानी जाती हैं. उनकी सफलता ने न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में महिला शिक्षा की चर्चा शुरू कर दी.

उनके साथ ही कादंबिनी गांगुली भी 1886 में ही मेडिकल डिग्री प्राप्त करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं, लेकिन आनंदीबाई को अक्सर देश की पहली महिला डॉक्टर के रूप में याद किया जाता है क्योंकि उन्होंने अमेरिका से डिग्री हासिल की थी.

स्वदेश वापसी

डिग्री प्राप्त करने के बाद आनंदीबाई भारत लौटीं. लेकिन दुर्भाग्यवश, केवल 22 वर्ष की आयु में ही 26 फरवरी 1887 को कोल्हापुर में निधन हो गया. उनकी मृत्यु का कारण तपेदिक (क्षय रोग) था.

उनकी छोटी सी उम्र में हुई मृत्यु ने पूरे देश को झकझोर दिया. उनकी प्रेरणादायक कहानी आज भी लाखों महिलाओं को प्रेरित करती है. आनंदीबाई जोशी की जीवन गाथा इतनी प्रेरक थी कि दूरदर्शन ने उनके जीवन पर आधारित सीरियल ‘आनंदी गोपाल’ प्रसारित किया था, जिसमें उनकी संघर्षपूर्ण यात्रा को दर्शाया गया था.

डॉ. आनंदीबाई जोशी ने साबित कर दिया कि शिक्षा और दृढ़ संकल्प के सामने कोई बाधा नहीं टिक सकती. उन्होंने दिखाया कि महिलाएं भी पुरुषों के बराबर चिकित्सा क्षेत्र में योगदान दे सकती हैं. आज जब हम महिला डॉक्टरों की बड़ी संख्या देखते हैं, तो उसकी नींव आनंदीबाई जैसे साहसी महिलाओं ने ही रखी थी.

आनंदीबेन जोशी का जीवन हमें याद दिलाता है कि सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए कितनी भी कठिनाइयां क्यों न हों, हार कभी नहीं माननी चाहिए.

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-भारत एक्सप्रेस



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