भारत में टेलीविजन की कहानी शिक्षा, विकास और तकनीकी आत्मनिर्भरता की प्रेरणा से जुड़ी है. यह केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं था, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक उपकरण बनकर उभरा.
प्रसारण की शुरुआत: 15 सितंबर 1959
भारत में टेलीविजन प्रसारण की आधिकारिक शुरुआत 15 सितंबर 1959 को नई दिल्ली में हुई. यह एक प्रायोगिक सेवा थी, जो ऑल इंडिया रेडियो के अंतर्गत शुरू की गई. एक छोटे ट्रांसमीटर और UNESCO की सहायता से बने कामचलाऊ स्टूडियो से प्रसारण शुरू हुआ. तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसका उद्घाटन किया.
शुरुआती दिनों में प्रसारण सप्ताह में केवल दो दिन, लगभग एक घंटे तक सीमित था. कार्यक्रम मुख्य रूप से सामुदायिक शिक्षा, स्वास्थ्य, यातायात नियमों और नागरिक कर्तव्यों पर केंद्रित थे. दिल्ली के आसपास “टेली-क्लब” बनाए गए, जहां लोग सामूहिक रूप से टीवी देखते थे. शुरुआती वर्षों में कवरेज बहुत सीमित (लगभग 40 किलोमीटर) था और टीवी सेट दुर्लभ थे.
पहला स्वदेशी टीवी सेट: ECIL की उपलब्धि
जब प्रसारण शुरू हो चुका था, तब भी टीवी सेट मुख्य रूप से आयातित थे. देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) ने उठाया.
ECIL की स्थापना 11 अप्रैल 1967 को हैदराबाद में हुई. इसके पीछे दो प्रमुख वैज्ञानिकों का योगदान था:
– डॉ. अय्यागरी सांबशिव राव (Dr. A. S. Rao) -ECIL के संस्थापक और पहले प्रबंध निदेशक. उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व ने कंपनी को इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में आगे बढ़ाया.
– डॉ. विक्रम साराभाई – भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक. उन्होंने ECIL को विशेष मार्गदर्शन और प्रोत्साहन दिया. वे कंपनी के चेयरमैन भी रहे.
इन दोनों वैज्ञानिकों का मुख्य उद्देश्य देश को इलेक्ट्रॉनिक्स और संबंधित तकनीकों में विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना तथा आत्मनिर्भर बनाना था.
ECIL ने सॉलिड-स्टेट ब्लैक-एंड-व्हाइट टीवी विकसित किया, जिसे ECTV (या Solid State TV) के नाम से बाजार में उतारा गया. यह भारत का पहला स्वदेशी टीवी सेट माना जाता है. ECIL की आधिकारिक उपलब्धियों में भी “First Solid State TV” को प्रमुखता से शामिल किया गया है.
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महत्व और विरासत
यह उपलब्धि सिर्फ एक उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं थी. यह उस सोच का प्रतीक थी जिसमें विज्ञान और तकनीक को समाज के उत्थान से जोड़ा गया. बाद के वर्षों में ECIL ने कंप्यूटर, परमाणु ऊर्जा उपकरण, अर्थ स्टेशन एंटीना और बाद में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) जैसी कई महत्वपूर्ण तकनीकें विकसित कीं.
आज जब भारत डिजिटल प्रसारण, OTT और स्मार्ट टीवी के युग में है, तब 1959 की वह छोटी शुरुआत और ECIL का स्वदेशी टीवी सेट याद दिलाते हैं कि कैसे एक युवा राष्ट्र ने सीमित संसाधनों के बावजूद तकनीकी आत्मनिर्भरता की नींव रखी.
यह कहानी डॉ. ए. एस. राव और डॉ. विक्रम साराभाई जैसे वैज्ञानिकों की दूरदृष्टि का प्रमाण है, जिन्होंने शिक्षा, विकास और नवाचार को प्राथमिकता दी.
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-भारत एक्सप्रेस
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