भारतीय राजनीति और संसदीय इतिहास में मीरा कुमार का नाम विशिष्ट है. 31 मार्च 1945 को बिहार के भोजपुर (आरा/सासाराम क्षेत्र) में जन्मी मीरा कुमार न केवल बाबू जगजीवन राम की सुपुत्री हैं, बल्कि उन्होंने स्वयं अपनी क्षमता, सौम्यता और दृढ़ता से देश की संसद की सर्वोच्च पदवी तक पहुंचकर एक नई मिसाल कायम की. वे 15वीं लोकसभा (2009-2014) की पहली महिला स्पीकर बनीं और आज भी यह गौरव उनके नाम दर्ज है.
मीरा कुमार का जन्म एक ऐसे राजनीतिक परिवार में हुआ जहां सामाजिक न्याय और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत गहराई तक समाई हुई थी. उनके पिता बाबू जगजीवन राम दलित समुदाय के प्रख्यात नेता, स्वतंत्रता सेनानी और भारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री थे. उनकी माता इंद्राणी देवी भी स्वतंत्रता संग्राम की सक्रिय कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता थीं. इस पृष्ठभूमि ने मीरा कुमार को प्रारंभ से ही सामाजिक न्याय, समानता और राजनीतिक जागरूकता का पाठ पढ़ाया.
मीरा कुमार की प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के प्रतिष्ठित स्कूलों में हुई. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ कॉलेज और मिरांडा हाउस से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक (बीए) और स्नातकोत्तर (एमए) किया. इसके बाद उन्होंने विधि स्नातक (एलएलबी) की उपाधि भी प्राप्त की.
1973 में वे भारतीय विदेश सेवा (IFS) में चयनित हुईं. स्पेन, ब्रिटेन और मॉरीशस में राजनयिक पदों पर काम किया. लेकिन नौकरशाही की बजाय सक्रिय राजनीति में योगदान देने का आकर्षण उन्हें ज्यादा था. पिता के प्रोत्साहन और राजीव गांधी के आह्वान पर उन्होंने 1985 में राजनीति में कदम रखा.
राजनीतिक सफर
- 1985: उत्तर प्रदेश के बिजनौर से पहली बार लोकसभा पहुंचीं (उप-चुनाव में मायावती और राम विलास पासवान जैसे उम्मीदवारों को हराया).
- वे कुल पांच बार लोकसभा सदस्य चुनी गईं — 8वीं, 11वीं, 12वीं, 14वीं और 15वीं लोकसभा.
- 1990 के दशक में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव और कांग्रेस कार्यकारिणी समिति की सदस्य रहीं.
- 2004 : यूपीए सरकार में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री बनीं. बाद में जल संसाधन मंत्रालय का भी संक्षिप्त कार्यभार संभाला.
लोकसभा की पहली महिला स्पीकर
3 जून 2009 को निर्विरोध 15वीं लोकसभा की स्पीकर चुनी गईं. यह भारतीय संसदीय इतिहास की एक मील का पत्थर था. वे न केवल पहली महिला स्पीकर बनीं, बल्कि जीएमसी बालयोगी के बाद दूसरी दलित समुदाय की स्पीकर भी थीं.
अपने कार्यकाल में मीरा कुमार ने संसदीय गरिमा, निष्पक्षता और परंपराओं का बखूबी निर्वहन किया. सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों के बीच उनका सौम्य लेकिन दृढ़ रवैया सराहा गया. वे बहसों को सुव्यवस्थित रखने और सदन की गरिमा बनाए रखने में सफल रहीं.
- 2017 में वे संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार बनीं (राम नाथ कोविंद के विरुद्ध).
- 1968 में उन्होंने मंजुल कुमार से विवाह किया. उनके एक पुत्र (अंशुल) और दो पुत्रियां (स्वाति एवं देवांगना) हैं.
मीरा कुमार की यात्रा दलित महिला सशक्तीकरण, सामाजिक न्याय और संसदीय लोकतंत्र की मजबूती की प्रतीक है. उन्होंने साबित किया कि पृष्ठभूमि चाहे जो भी हो, योग्यता, समर्पण और सिद्धांतों के साथ कोई भी ऊंचाई हासिल की जा सकती है. उनकी सौम्य मुस्कान और दृढ़ फैसलों ने संसद को एक नई गरिमा प्रदान की.
-भारत एक्सप्रेस
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