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एनके गौड़ा: किताबों के प्रति जुनून से बनी देश की सबसे बड़ी निजी लाइब्रेरी, अब पद्मश्री से सम्मानित

साधारण बस कंडक्टर से ‘अक्षर योगी’ बने एनके गौड़ा की प्रेरक यात्रा बताती है कि जुनून और त्याग से ज्ञान का ऐसा खजाना खड़ा किया जा सकता है, जो समाज और आने वाली पीढ़ियों को रोशन करे.

कर्नाटक के मांड्या जिले के हरलहल्ली गांव के रहने वाले 75 वर्षीय एनके गौड़ा (Anke Gowda) को पद्मश्री से सम्मानित करने का ऐलान किया है. यह सम्मान उन्हें साहित्य और ज्ञान के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए दिया गया है. एक साधारण पूर्व बस कंडक्टर से लेकर ‘अक्षर योगी’ के रूप में पहचाने जाने वाले एनके गौड़ा ने दशकों की मेहनत, अपनी सारी जमापूंजी और यहां तक कि अपना घर बेचकर भी देश की सबसे बड़ी निजी लाइब्रेरी ‘पुस्तक माने’ खड़ी की है.

यह लाइब्रेरी मैसूर के निकट मांड्या जिले के हरलहल्ली गांव में स्थित है और इसमें 20 लाख से अधिक पुस्तकें संग्रहित हैं. इनमें दुनिया भर की विभिन्न भाषाओं और विषयों की किताबें शामिल हैं—करीब 5 लाख दुर्लभ विदेशी किताबें, 5,000 से ज्यादा डिक्शनरी, और 22 से अधिक भाषाओं में साहित्य है.

यह लाइब्रेरी आम जनता के लिए पूरी तरह मुफ्त है, जहां कोई भी छात्र, शोधार्थी या किताब प्रेमी आकर पढ़ सकता है. एन्के गौड़ा ने इसे ज्ञान का एक ऐसा खजाना बनाया है जो दूर-दराज के गांवों तक शिक्षा और जागरूकता पहुंचा रहा है.

बस की टिकट से किताबों तक का सफर

एनके गौड़ा की यात्रा बेहद प्रेरणादायक है. वे पहले KSRTC में बस कंडक्टर थे और बाद में चीनी मिल में काम किया. अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा किताबें खरीदने में लगा देते थे. धीरे-धीरे संग्रह इतना बड़ा हो गया कि घर में जगह नहीं बची. उन्होंने अपना घर बेच दिया और पूरा जीवन इस संग्रह को समर्पित कर दिया. आज यह लाइब्रेरी न सिर्फ भारत की सबसे बड़ी निजी संग्रह है, बल्कि दुनिया के कुछ सबसे बड़े व्यक्तिगत पुस्तकालयों में से एक मानी जाती है.

एक फेसबुक यूजर का चित्रण

बेंगलुरु दौरे के दौरान मैंने उनके साथ उनकी इस लाइब्रेरी में कई घंटे बिताए. हमने लंबी बातचीत की, किताबों के बीच घूमे और उनके जुनून को करीब से महसूस किया. उस दौरान मैंने कई तस्वीरें भी खींचीं—उनकी आंखों में किताबों के प्रति जो चमक थी, वो आज भी याद है. एक छोटे से गांव में बैठकर उन्होंने ज्ञान का ऐसा साम्राज्य खड़ा किया है जो लाखों लोगों को प्रेरित कर रहा है.

एनके गौड़ा की कहानी बताती है कि सच्चा जुनून और समर्पण अगर हो तो कोई भी व्यक्ति समाज के लिए कुछ बड़ा कर सकता है. पद्मश्री जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से उनका यह योगदान अब पूरे देश के सामने आ गया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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