First Female IIT Director: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के दशकों पुराने इतिहास में महिलाएं हमेशा से एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं, लेकिन शीर्ष नेतृत्व पदों तक उनकी पहुँच काफी दुर्लभ रही. वर्ष 2023 में यह ऐतिहासिक तस्वीर तब बदली, जब IIT मद्रास ने तंजानिया के जंजीबार में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय परिसर खोला. इस वैश्विक विस्तार के साथ ही प्रोफेसर प्रीति अघालयम को निदेशक (प्रभारी) के रूप में नियुक्त किया गया, जिससे वे किसी भी IIT का नेतृत्व करने वाली देश की पहली महिला बनीं.
IIT मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग में B.Tech करने के बाद मैसाचुसेट्स विश्वविद्यालय से PhD करने वाली प्रो. प्रीति अघालयम के लिए यह उपलब्धि अपनी ही जड़ों की ओर लौटने जैसी है. IIT बॉम्बे और IIT मद्रास में लंबे समय तक अध्यापन के साथ-साथ वे ’75 वुमेन इन STEM’ की सूची में भी अपना स्थान बना चुकी हैं. जंजीबार कैंपस में डेटा साइंस और AI जैसे आधुनिक पाठ्यक्रमों के साथ वे भारत और तंजानिया के बीच एक मजबूत शैक्षणिक सेतु का निर्माण कर रही हैं.
IIT के 72 साल के इतिहास में पहली बार: महिला के हाथों में कमान
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) के दशकों लंबे इतिहास में महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है, लेकिन शीर्ष नेतृत्व के पदों पर उनकी मौजूदगी हमेशा दुर्लभ ही रही. साल 2023 में यह ऐतिहासिक गतिरोध तब टूटा जब IIT मद्रास ने अफ्रीका के तंजानिया स्थित जंजीबार में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय परिसर स्थापित किया. इस अंतरराष्ट्रीय पहल के साथ ही प्रोफेसर प्रीति अघालयम को जंजीबार कैंपस का निदेशक (प्रभारी) नियुक्त किया गया, जिसके साथ ही वे किसी भी IIT का नेतृत्व करने वाली देश की पहली महिला बन गईं.
छात्र से निदेशक तक का सफर: जंजीबार में दोहराई सफलता
प्रोफेसर अघालयम के लिए यह प्रतिष्ठित जिम्मेदारी केवल एक नया पद नहीं है, बल्कि उस संस्थान के प्रति एक महान समर्पण है जहां से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी. उन्होंने 1991 में IIT मद्रास से ही केमिकल इंजीनियरिंग में B.Tech की डिग्री हासिल की थी. इसके बाद उन्होंने अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट से PhD पूरी की और MIT में शोध कार्य किया. भारत लौटने के बाद उन्होंने IIT बॉम्बे में फैकल्टी के रूप में पढ़ाया और 2010 से वे IIT मद्रास में केमिकल इंजीनियरिंग की प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दे रही हैं.
STEM में महिलाओं की सिरमौर और राष्ट्रीय सम्मान
क्लासरूम और लैब से बाहर भी प्रो. अघालयम का योगदान असाधारण रहा है. केंद्र सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय द्वारा उन्हें ’75 वुमेन इन STEM’ की सूची में सम्मानित किया गया है. वे IIT मद्रास के ‘जेंडर एडवांसमेंट फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंस्टीट्यूशंस’ कार्यक्रम की प्रमुख स्तंभ रही हैं. उनकी उत्कृष्ट वैज्ञानिक और शैक्षणिक सेवाओं के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल इंजीनियर्स द्वारा उन्हें ‘अमर डाई केम अवार्ड’ और ‘IICHE यंग अचीवर अवार्ड’ से भी नवाजा जा चुका है.
भारत और अफ्रीका के बीच नया शैक्षणिक सेतु
अब प्रो. प्रीति अघालयम भारत से बाहर खुले पहले IIT परिसर का नेतृत्व कर एक नई मिसाल पेश कर रही हैं. जंजीबार कैंपस में पढ़ाई की शुरुआत डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे भविष्य के आधुनिक विषयों के साथ हुई है, जो भारत और तंजानिया के बीच शैक्षणिक और तकनीकी रिश्तों को एक नया आयाम दे रहा है. इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर प्रो. अघालयम का कहना है, ‘मैं IIT मद्रास की पूर्व छात्रा हूँ और अपने संस्थान व देश के लिए इस स्तर पर काम करना मेरे लिए बेहद गर्व और सम्मान की बात है.’
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-भारत एक्सप्रेस
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