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जनकी अम्मा: दक्षिण भारत की नाइटिंगेल की अमर विरासत

दक्षिण भारतीय संगीत की अमर आवाज़ एस. जानकी अब हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन उनके गीत हमेशा श्रोताओं के दिलों में गूंजते रहेंगे.

दक्षिण भारतीय संगीत की दुनिया में कुछ आवाजें ऐसी होती हैं जो समय के साथ पुरानी नहीं पड़तीं. एस. जानकी उन्हीं चुनिंदा गायिकाओं में शामिल थीं, जिनकी आवाज सिर्फ कानों तक नहीं, सीधे दिल तक पहुंचती थी. उनके गीत सुनते ही श्रोता भावनाओं की एक अलग ही दुनिया में खो जाते थे. चाहे प्यार का एहसास हो, बिछड़ने का दर्द, खुशी की चमक या मन की उदासी—जानकी हर भावना को अपनी गायकी में इस तरह ढाल देती थीं कि गीत सुनने वाला खुद को उससे जुड़ा हुआ महसूस करता था.

मलयालम का ‘थेनुम वायंबुम’, तमिल का ‘चिन्ना थायावल’, कन्नड़ का ‘नागुवा नयना’ या फिर तेलुगु का ‘पुव्वु नवेनु’ इन गीतों को सिर्फ उनकी आवाज ने नहीं, बल्कि उनकी भावनाओं ने अमर बना दिया. यही वजह रही कि दक्षिण भारत का हर संगीत प्रेमी उनके किसी न किसी गीत को अपनी सबसे खास यादों से जोड़कर देखता है.

एस. जानकी ने हिंदी और सिंहली भाषा में भी कई गीत गाए, लेकिन उनकी सबसे गहरी पहचान दक्षिण भारत में बनी. उनकी लोकप्रियता इतनी व्यापक थी कि केरल उन्हें अपनी बेटी मानता था, तमिलनाडु उन्हें अपनी पहचान की आवाज कहता था, कर्नाटक उन्हें अपनी आत्मा और आंध्र प्रदेश व तेलंगाना उन्हें अपने दिल की धड़कन मानते थे. अलग-अलग भाषाओं में गाने के बावजूद उन्होंने हर संस्कृति और हर श्रोता से एक खास रिश्ता बना लिया था.

शोहरत मिली, लेकिन सादगी कभी नहीं छोड़ी

संगीत की दुनिया में बेमिसाल सफलता हासिल करने के बाद भी एस. जानकी हमेशा बेहद सादगी से भरा जीवन जीती रहीं. पुरस्कारों और सम्मान की लंबी सूची होने के बावजूद उन्होंने कभी खुद को दूसरों से अलग या बड़ा नहीं माना. वे कैमरों की चमक-दमक से दूर रहना पसंद करती थीं और हमेशा अपने काम को ही अपनी पहचान मानती थीं. उनके हर इंटरव्यू और हर प्रस्तुति में संगीत के प्रति गहरा सम्मान और श्रोताओं के प्रति अपनापन साफ दिखाई देता था.

88 साल की उम्र में थम गई जिंदगी

11 जुलाई को 88 वर्ष की उम्र में मैसूरु में हृदय गति रुकने के कारण एस. जानकी का निधन हो गया. उनके जाने से भारतीय संगीत जगत ने एक ऐसी कलाकार को खो दिया, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी. हालांकि उनकी आवाज आज भी लाखों लोगों की यादों में उसी तरह जिंदा है और आने वाले वर्षों में भी रहेगी.

जब भी रेडियो, टीवी या मोबाइल पर उनका कोई पुराना गीत बजेगा, लोग सिर्फ एक गाना नहीं सुनेंगे, बल्कि उन भावनाओं को फिर से महसूस करेंगे जिन्हें जानकी अपनी गायकी के जरिए जीवंत कर देती थीं. यही किसी महान कलाकार की सबसे बड़ी पहचान होती है कि उसके जाने के बाद भी उसकी कला लोगों के दिलों में हमेशा जिंदा रहती है.

एस. जानकी से जुड़ी खास बातें-

  • वर्ष 1938 में आंध्र प्रदेश के पास जन्म हुआ.
  • छह दशकों से भी लंबे संगीत सफर में 48 हजार से अधिक गीत गाए.
  • 20 से ज्यादा भाषाओं में अपनी मधुर आवाज का जादू बिखेरा.
  • चार बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित हुईं.
  • महान गायक एस.पी. बालसुब्रमण्यम समेत कई प्रतिभाओं को संगीत जगत में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण अवसर दिलाने में अहम भूमिका निभाई.

एस. जानकी अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज भारतीय संगीत की विरासत का ऐसा हिस्सा बन चुकी है, जिसे समय कभी मिटा नहीं पाएगा. उनके गीत आने वाली पीढ़ियों को भी उसी तरह भावुक करेंगे, जैसे उन्होंने दशकों तक करोड़ों श्रोताओं के दिलों को छुआ.

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भारत एक्सप्रेस



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