कल यानी 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सिक्किम के 50वें स्थापना दिवस में शामिल हुए. बता दें कि 16 मई 1975 को सिक्किम आधिकारिक रूप से भारतीय संघ का 22वां राज्य बना था. इस अवसर पर हम सिक्किम के भारत में विलय की प्रक्रिया को समझते हैं, जो हिमालयी क्षेत्र की भू-राजनीति, आंतरिक राजनीतिक उथल-पुथल और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का मिश्रण थी.
सिक्किम एक प्राचीन हिमालयी राज्य था, जिसकी स्थापना 1642 में नामग्याल वंश के चोग्याल (राजा) के रूप में हुई. ब्रिटिश काल में 1817 के टिटाल्या संधि से शुरू होकर सिक्किम ब्रिटिश प्रभाव में आया. ब्रिटिशों ने 1890 से 1908 तक इसे सीधे प्रशासित भी किया. 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद सिक्किम ने पूर्ण विलय की मांग की, लेकिन भारत सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया.
1950 में भारत और सिक्किम के बीच एक संधि (Indo-Sikkim Treaty) हुई, जिसके तहत सिक्किम भारत का संरक्षित राज्य बन गया. भारत को सिक्किम की रक्षा, विदेश नीति और संचार की जिम्मेदारी सौंपी गई, जबकि आंतरिक मामलों में चोग्याल को कुछ स्वायत्तता थी. अंतिम चोग्याल पाल्देन थोंडुप नामग्याल थे.
विलय की ओर बढ़ते कदम (1970 के दशक)
1970 के दशक में सिक्किम में लोकतांत्रिक सुधारों की मांग जोर पकड़ने लगी. मुख्य मुद्दा था:
- जातीय असंतुलन : सिक्किम की आबादी में नेपाली मूल के लोग बहुसंख्यक थे, लेकिन भुटिया-लेपचा समुदाय को चुनावों में वोट का विशेषाधिकार (एक भुटिया/लेपचा वोट = छह नेपाली वोट) प्राप्त था. इससे असंतोष बढ़ा.
- राजनीतिक दल जैसे सिक्किम नेशनल कांग्रेस (काजी लेहेंदुप दोर्जे के नेतृत्व में) लोकतंत्र और सुधार की मांग कर रहे थे.
1973 में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए. स्थिति बिगड़ने पर भारत सरकार ने हस्तक्षेप किया. 8 मई 1973 को चोग्याल, राजनीतिक दलों और भारत सरकार के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ, जिसमें सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार (one man, one vote) पर आधारित चुनाव और लोकतांत्रिक व्यवस्था का प्रावधान किया गया.
1974 में चुनाव हुए, जिसमें काजी लेहेंदुप दोर्जे की पार्टी ने भारी जीत हासिल की (32 में से 31 सीटें). नई सभा ने भारत के साथ और मजबूत संबंधों की मांग की. सिक्किम को पहले Associate State का दर्जा मिला.
1975 का निर्णायक मोड़
अप्रैल 1975 में सिक्किम सभा ने राजतंत्र समाप्त करने और भारत के पूर्ण राज्य बनने का प्रस्ताव पारित किया.
- 14 अप्रैल 1975 को जनमत संग्रह (referendum) कराया गया. आधिकारिक परिणामों के अनुसार लगभग 63% मतदान में 97.55% लोगों ने राजतंत्र समाप्ति और भारत में पूर्ण विलय के पक्ष में वोट दिया.
- भारतीय सेना ने गंगटोक में चोग्याल के महल को घेर लिया (भारतीय पक्ष इसे सुरक्षा बताया, जबकि आलोचक इसे हाउस अरेस्ट कहते हैं).
- 26 अप्रैल 1975 को भारतीय संसद ने 36वें संविधान संशोधन को मंजूरी दी.
- 16 मई 1975 को राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने इसे अधिसूचित किया. सिक्किम भारत का 22वां राज्य बन गया और चोग्याल की सत्ता समाप्त हो गई.
यह प्रक्रिया भारत की सुरक्षा चिंताओं (चीन की निकटता और 1962 के युद्ध के बाद हिमालयी सीमा की संवेदनशीलता) से प्रेरित थी. कुछ इतिहासकार और आलोचक इसे “merger” (विलय) कहते हैं, तो कुछ “annexation” ( annexation) या ‘smash and grab’ की संज्ञा देते हैं, जिसमें भारतीय खुफिया एजेंसियों (RAW) की भूमिका का जिक्र किया जाता है. चोग्याल ने इसे जबरन बताया, जबकि भारतीय पक्ष इसे सिक्किमी जनता की लोकतांत्रिक इच्छा का प्रतिबिंब मानता है.
विलय के बाद
विलय के बाद सिक्किम में लोकतंत्र मजबूत हुआ, विकास कार्य तेज हुए और यह पर्यावरण संरक्षण, जैविक खेती और पर्यटन के क्षेत्र में आगे बढ़ा. हालांकि, कुछ पुराने सिक्किमी अभी भी अपनी अलग पहचान और राजतंत्र की याद रखते हैं.
इससे संबंधित महत्वपूर्ण पुस्तकें
सिक्किम विलय पर कई महत्वपूर्ण किताबें लिखी गई हैं, जो अलग-अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैं:
1. Smash and Grab: The Annexation of Sikkim — लेखक Sunanda K. Datta-Ray
यह किताब विलय को “annexation” के रूप में देखती है. लेखक चोग्याल के करीबी थे और घटनाओं का विस्तृत वर्णन करते हैं. यह भारतीय खुफिया भूमिका, राजनीतिक चालबाजियों और चोग्याल की स्थिति पर रोशनी डालती है. यह काफी विवादास्पद रही और लंबे समय तक मुकदमों का शिकार रही. कई सिक्किमी इसे सबसे प्रामाणिक मानते हैं.
2. Sikkim – Dawn of Democracy: The Truth Behind The Merger With India — लेखक G.B.S. Sidhu
लेखक भारतीय खुफिया अधिकारी थे, जो 1973-75 के दौरान सिक्किम में तैनात थे. यह किताब भारतीय पक्ष से लिखी गई है और विलय को भारत की सुरक्षा जरूरत और लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का परिणाम बताती है. RAW और इंदिरा गांधी सरकार की भूमिका का आंतरिक विवरण मिलता है.
3. Sikkim: A History of Intrigue and Alliance — लेखक Preet Mohan Singh Malik (पूर्व राजनयिक)
सिक्किम के पूरे इतिहास, नामग्याल वंश, भुटिया-लेपचा और नेपाली समुदायों के संबंधों तथा 1975 के विलय की पृष्ठभूमि पर विस्तृत चर्चा. यह किताब रहस्यों और गठबंधनों को उजागर करती है.
4. The Sikkim Saga — लेखक Brajbir Saran Das
सिक्किम के तत्कालीन प्रशासनिक अनुभवों पर आधारित. 1973-75 की राजनीतिक घटनाओं का वर्णन.
5. Sikkim: Requiem for a Himalayan Kingdom — लेखक Andrew Duff
हिमालयी राज्य के रूप में सिक्किम के अंत की कहानी, जिसमें चोग्याल, उनकी पत्नी होप कुक और विलय की प्रक्रिया शामिल है. ये पुस्तकें घटना के बहुआयामी चरित्र को दिखाती हैं—कुछ इसे लोकतंत्र की जीत मानती हैं, तो कुछ साम्राज्यवादी चाल के रूप में.
सिक्किम का विलय भारत के इतिहास में एक अनोखा अध्याय है, जहां भू-राजनीति, लोकतंत्र और पहचान की लड़ाई एक साथ चली. 50 वर्ष बाद आज सिक्किम भारत का अभिन्न अंग है, जो अपनी सांस्कृतिक विविधता और प्रगति के साथ आगे बढ़ रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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