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एक अंग्रेज जो हमेशा के लिए भारत का बन कर रह गया

भारत के लिए प्रिय विदेशी पत्रकार सर मार्क टली का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया. बीबीसी के भारत ब्यूरो चीफ रहे टली ने ऑपरेशन ब्लू स्टार, आपातकाल और बाबरी मस्जिद विध्वंस जैसी घटनाओं को कवर किया और अपनी विनम्रता, सत्यनिष्ठा और भारत प्रेम से लोगों के दिलों में जगह बनाई.

आज भारत के सबसे प्रिय और सम्मानित विदेशी पत्रकारों में से एक सर मार्क टली का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उनका जाना न केवल बीबीसी के लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए एक युग का अंत है. जैसे कोई पितामह विदा हो गया हो, जिसकी आवाज दशकों तक लाखों भारतीयों के कानों में गूंजती रही.

मार्क टली का जीवन भारत से इतना गहराई से जुड़ा था कि वे एक अंग्रेज़ होते हुए भी “भारत का बनकर रह गए”. 24 अक्टूबर 1935 को कोलकाता (तब कलकत्ता) में जन्मे, उनका बचपन ब्रिटिश परिवार की छत्रछाया में बीता, लेकिन भारत की मिट्टी ने उन्हें हमेशा खींचा. द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान दार्जिलिंग में पढ़ाई, फिर ब्रिटेन में बोर्डिंग स्कूल और कैम्ब्रिज में धर्मशास्त्र की पढ़ाई – वे पादरी बनना चाहते थे, लेकिन नियति ने उन्हें पत्रकारिता की ओर मोड़ा. 1964 में बीबीसी में शामिल होने के बाद 1965 में वे भारत लौट आए और यहीं बस गए.

बीबीसी के भारत ब्यूरो चीफ के रूप में उन्होंने ऑपरेशन ब्लू स्टार, इंदिरा गांधी की हत्या, बाबरी मस्जिद विध्वंस, आपातकाल जैसी ऐतिहासिक घटनाओं को कवर किया. आपातकाल में उन्हें भारत से निकाला गया, लेकिन वे वापस लौटे. उनकी आवाज – वो शांत, संतुलित, विनम्र अंग्रेजी – बीबीसी हिंदी सेवा और वर्ल्ड सर्विस के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंची. लोग सरकारी रेडियो पर भरोसा न करने के दौर में बीबीसी को “सत्य की आवाज़” मानते थे, और उस आवाज में मार्क टली थे.

विविधता को समझने वाला ब्रिटिश पत्रकार

विनम्रता उनकी सबसे बड़ी खासियत थी. वे कहते थे, “मुझे तो ज्यादा मालूम नहीं, आप बताइए…” – भले ही विषय पर उनकी पकड़ गहरी हो. झारखंड के संतालों-मुंडाओं से लेकर केरल के आदिवासियों तक, उत्तर प्रदेश के निषादों से बिहार के मुसहरों तक – भारत की विविधता को वे बराबर समझते थे. उनकी किताब ‘No Full Stops in India’ हर उस व्यक्ति के लिए जरूरी है जो भारत को समझना चाहता है. इसमें वे एक ब्रिटिश अर्थशास्त्री के हवाले से लिखते हैं: “Whatever you can rightly say about India, the opposite is also true” – भारत के बारे में जो सही कहा जा सकता है, उसका विपरीत भी सत्य है. यही उनकी समझ की गहराई थी – वे भारत को जटिल, विरोधाभासी लेकिन खूबसूरत मानते थे.

उनकी अन्य प्रमुख किताबें जैसे ‘India in Slow Motion’ ‘Upcountry Tales: Once Upon a Time in the Heart of India’, ‘The Heart of India’ ने भारत की सच्चाई को दुनिया के सामने रखा. भारत सरकार ने उन्हें 1992 में पद्म श्री और 2005 में पद्म भूषण से सम्मानित किया. 2002 में ब्रिटेन की महारानी ने उन्हें नाइट की उपाधि दी – सर मार्क टली.

विनम्रता, सत्यनिष्ठा और भारत से अटूट प्रेम

हिंदी पाठकों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है कि उनकी कुछ रचनाएँ हिंदी में भी उपलब्ध हैं. राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित उनकी प्रमुख किताब ‘धीमी वाली फास्ट पैसेंजर’ है, जो उनकी अंग्रेजी किताब Upcountry Tales का हिंदी अनुवाद है. प्रभात सिंह द्वारा अनूदित यह कहानी संग्रह 2023 में प्रकाशित हुआ और पूर्वांचल की कस्बाई जिंदगी, छोटे शहरों की कहानियों और भारतीय समाज की बारीकियों को मार्मिक ढंग से उकेरता है. यह उनकी दूसरी कथाकृति है, जो पचास से अधिक वर्षों के भारतीय अनुभव से निकली.

उनकी विरासत जिंदा रहेगी – विनम्रता, सत्यनिष्ठा, भारत से अटूट प्रेम में. एक ऋषि जैसा जीवन जीकर वे विदा हुए.

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-भारत एक्सप्रेस



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