21 जुलाई 1960 का दिन दुनिया की राजनीति के इतिहास में हमेशा याद किया जाएगा. इसी दिन श्रीलंका की सिरिमावो बंदरनायके ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर एक ऐसा इतिहास रचा, जिसकी चर्चा आज भी होती है. वह दुनिया की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं और उन्होंने यह साबित किया कि महिलाएं भी देश की सबसे बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी संभाल सकती हैं.
उस दौर में राजनीति को काफी हद तक पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था. ऐसे समय में सिरिमावो बंदरनायके का प्रधानमंत्री बनना केवल श्रीलंका के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की महिलाओं के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी. उनके नेतृत्व ने राजनीति में महिलाओं की भागीदारी के लिए नए रास्ते खोले.
एक साधारण शुरुआत से राजनीति के शिखर तक का सफर
सिरिमावो बंदरनायके का जन्म 17 अप्रैल 1916 को श्रीलंका के महावलाथेन्ना में हुआ था. वह एक प्रतिष्ठित और संपन्न परिवार से आती थीं. वर्ष 1940 में उनका विवाह सोलोमन वेस्ट रिजवे डायस बंदरनायके से हुआ, जो बाद में श्रीलंका के प्रमुख राजनीतिक नेताओं में शामिल हुए.
1956 में उनके पति सोलोमन बंदरनायके श्रीलंका के प्रधानमंत्री बने. हालांकि, 1959 में उनकी हत्या कर दी गई. इस घटना ने सिरिमावो के जीवन को पूरी तरह बदल दिया. पति की मृत्यु के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे पार्टी तथा देश की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई.
पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का ऐतिहासिक मौका
1960 में सिरिमावो बंदरनायके को श्रीलंका फ्रीडम पार्टी की अध्यक्ष चुना गया. इसके बाद उसी वर्ष हुए चुनावों में उनकी पार्टी को सफलता मिली और उन्होंने प्रधानमंत्री पद संभाला. इस उपलब्धि के साथ उनका नाम दुनिया की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में दर्ज हो गया.
अपने लंबे राजनीतिक जीवन में वह तीन बार श्रीलंका की प्रधानमंत्री बनीं. उन्होंने 1960, 1970 और 1994 में देश का नेतृत्व किया. उनके कार्यकाल के दौरान श्रीलंका में सामाजिक सुधारों, आर्थिक नीतियों और प्रशासनिक बदलावों पर काफी जोर दिया गया. मजबूत फैसले लेने की क्षमता और राजनीतिक अनुभव के कारण उन्हें एक प्रभावशाली नेता माना जाता था.
उनके बाद कई महिलाओं ने संभाली देश की कमान
- सिरिमावो बंदरनायके के बाद दुनिया के कई देशों में महिलाओं ने प्रधानमंत्री और राष्ट्र प्रमुख के पद तक पहुंचकर अपनी क्षमता साबित की.
- भारत में इंदिरा गांधी 1966 में देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं. अपने मजबूत नेतृत्व और बड़े राजनीतिक फैसलों के लिए उन्हें याद किया जाता है.
- गोल्डा मेयर 1969 में इजरायल की प्रधानमंत्री बनीं और उन्होंने कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में देश का नेतृत्व किया.
- मार्गरेट थैचर 1979 में ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं. उनके कड़े फैसलों के कारण उन्हें “आयरन लेडी” के नाम से जाना गया.
- बेनजीर भुट्टो 1988 में पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनीं और मुस्लिम बहुल देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनने का गौरव हासिल किया.
- इसके अलावा शेख हसीना और जेसिंडा आर्डर्न जैसी नेताओं ने भी अपने-अपने देशों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और महिला नेतृत्व की ताकत को दुनिया के सामने रखा.
विरासत जो आज भी कायम है
10 अक्टूबर 2000 को दिल का दौरा पड़ने से सिरिमावो बंदरनायके का निधन हो गया. उस समय उनकी उम्र 84 वर्ष थी. हालांकि, उनके जाने के बाद भी उनका योगदान इतिहास में दर्ज रहा. उन्होंने यह संदेश दिया कि नेतृत्व क्षमता किसी लिंग की मोहताज नहीं होती. उनकी बेटी चंद्रिका कुमारातुंगा भी आगे चलकर श्रीलंका की राष्ट्रपति बनीं, जो उनके परिवार की राजनीतिक विरासत को दर्शाता है.
सिरिमावो बंदरनायके का जीवन आज भी उन लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो राजनीति और समाज में अपनी पहचान बनाने का सपना देखती हैं.
ये भी पढ़ें: जंतर-मंतर से संसद तक… CJP समर्थन के बाद पीएम मोदी से शरद पवार-सुप्रिया सुले की मुलाकात
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.



