Urdu Conclave 2026

वर्षा अशोक अगलावे बनीं भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संगठन की पहली महिला महानिदेशक

वर्षा अशोक अगलावे ने 31 जुलाई को भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संगठन (GSI) के 54वें महानिदेशक का पदभार संभालते हुए 176 वर्षों का इतिहास बदल दिया. वे GSI की पहली महिला महानिदेशक बनी हैं और अब क्रिटिकल मिनरल्स, ऑफशोर अन्वेषण तथा भूवैज्ञानिक अनुसंधान को नई दिशा देंगी.

Edited by Rohit Agrawal

बीते 31 जुलाई को भारत के वैज्ञानिक जगत में इतिहास रचा गया है. वर्षा अशोक अगलावे ने भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण संगठन (Geological Survey of India – GSI) के 54वें महानिदेशक का पदभार ग्रहण किया. वे इस प्रतिष्ठित संस्था की 176 वर्ष की यात्रा में पहली महिला महानिदेशक बनीं.

GSI की स्थापना 1851 में हुई थी. तब से लेकर अब तक यह संगठन भारत की भूवैज्ञानिक विरासत, खनिज संसाधनों की खोज और भूवैज्ञानिक ज्ञान के विस्तार में अग्रणी भूमिका निभाता आया है. इस लंबे इतिहास में पहली बार किसी महिला वैज्ञानिक को इस सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है. यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत स्तर पर महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय विज्ञान में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व क्षमता का भी प्रतीक है.

शैक्षणिक पृष्ठभूमि और करियर

वर्षा अशोक अगलावे कलकत्ता विश्वविद्यालय से भूविज्ञान में स्वर्ण पदक विजेता हैं. उन्होंने भारतीय खान ब्यूरो में सेवा के बाद 1992 में GSI में भूवैज्ञानिक के रूप में योगदान दिया. तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने GSI के केंद्रीय, उत्तरी और पूर्वी क्षेत्रों के साथ-साथ केंद्रीय मुख्यालय में कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और प्रशासनिक पदों पर कार्य किया. महानिदेशक बनने से पहले वे पूर्वी क्षेत्र (कोलकाता) की अतिरिक्त महानिदेशक एवं विभागाध्यक्ष थीं.

वैज्ञानिक योगदान

अगलावे पेलियंटोलॉजी (जीवाश्म विज्ञान) और पैलिनोलॉजी (पराग एवं बीजाणु अध्ययन) की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विशेषज्ञ हैं. उन्होंने लेट क्रिटेशियस-पेलियोसीन अवसादों, के-टी बाउंड्री और सतपुड़ा-गोंडवाना बेसिनों के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

उनकी सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक मध्य भारत के सालबर्डी-घोरपेंड क्षेत्र को नए डायनासोर घोंसले स्थल के रूप में पहचानना है. उन्होंने मिशिगन विश्वविद्यालय के म्यूजियम ऑफ पेलियंटोलॉजी के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोगात्मक शोध में भी भाग लिया. इसके अलावा, उन्होंने लखनऊ स्थित उत्तरी क्षेत्र कार्यालय में अत्याधुनिक पैलिनोलॉजी प्रयोगशाला की स्थापना सहित GSI की वैज्ञानिक अवसंरचना और डिजिटल क्षमताओं को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

नई जिम्मेदारियों पर जोर

पदभार ग्रहण करते हुए श्रीमती अगलावे ने कहा कि GSI सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप क्रिटिकल और रणनीतिक खनिजों की खोज तथा खनिज सुरक्षा पर विशेष ध्यान देगा. उन्होंने गहरी और छिपी हुई खनिज जमाओं की खोज तेज करने, अपतटीय (offshore) खनिज अन्वेषण का विस्तार करने, प्रयोगशाला अवसंरचना को मजबूत करने, प्राकृतिक आपदा अध्ययन, ग्लेशियोलॉजी जैसे जनहित के भूवैज्ञानिक कार्यक्रमों को बढ़ावा देने तथा युवा भूवैज्ञानिकों के क्षमता निर्माण पर बल दिया.

वे इस बात पर भी जोर देती हैं कि GSI वैज्ञानिक प्रकाशनों को बढ़ावा देकर और उन्नत भूवैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करके राष्ट्र की बढ़ती खनिज मांग को पूरा करने के लिए तैयार है.

यह भी पढ़िए: Commonwealth Games: कौशल, समर्पण और अथक प्रयास..UK में भारतीय खिलाड़ियों को तिरंगा लहराते देखकर गृहमंत्री अमित शाह हुए गदगद

यह भी बताते चलें वर्षा अशोक अगलावे का यह नेतृत्व न केवल GSI के लिए बल्कि पूरे देश के भूवैज्ञानिक समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत है. उनकी नियुक्ति इस बात का प्रमाण है कि वैज्ञानिक योग्यता, समर्पण और दूरदर्शिता ही सच्ची पहचान है. GSI के नए अध्याय में उनकी अगुवाई में देश की खनिज सुरक्षा और भूवैज्ञानिक ज्ञान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूने की उम्मीद है.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read