विदेश सचिव विक्रम मिस्री 12–14 अप्रैल 2026 तक पेरिस और बर्लिन का दौरा करेंगे, जहां वे फ्रांस और जर्मनी के साथ विदेश कार्यालय परामर्श की सह-अध्यक्षता करेंगे. इस दौरान रक्षा, व्यापार, तकनीक, AI, ग्रीन एनर्जी और वैश्विक मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी, जिससे भारत के दोनों देशों के साथ रणनीतिक संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है. चलिए जानते है पूरा मामला:
रणनीतिक सहयोग पर जोर
पेरिस में विदेश सचिव भारत-फ्रांस विदेश कार्यालय परामर्श (Foreign Office Consultations) की सह-अध्यक्षता करेंगे. उनके साथ फ्रांस के विदेश मंत्रालय के महासचिव मार्टिन ब्रिएन्स भी शामिल होंगे. इस बैठक में रक्षा, सिविल न्यूक्लियर ऊर्जा, अंतरिक्ष, साइबर और डिजिटल सहयोग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नवाचार और सांस्कृतिक व जन-से-जन संपर्क जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर चर्चा की जाएगी. साथ ही वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा.
बर्लिन में द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा
बर्लिन में विदेश सचिव भारत-जर्मनी विदेश कार्यालय परामर्श की सह-अध्यक्षता करेंगे. इस दौरान जर्मन विदेश कार्यालय के राज्य सचिव गेज़ा आंद्रेयास वॉन गेयर (Géza Andreas von Geyr) समकक्ष होंगे. यहां बातचीत का फोकस व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, हरित ऊर्जा, विकास सहयोग, शिक्षा और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर रहेगा. इसके अलावा वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी.
अन्य उच्चस्तरीय मुलाकातें
इस यात्रा के दौरान विदेश सचिव पेरिस और बर्लिन में अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों से भी मुलाकात करेंगे, जिससे दोनों देशों के साथ भारत के संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.
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-भारत एक्सप्रेस
Written By: Shubhra Rai (Intern)
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