वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर एयरप्लेन के टकराने से ठीक 48 घंटे पहले अफगानिस्तान में अहमद मसूद की हुई थी हत्या (इमेज- X.com)
Ahmad Shah Massoud Assassination: अमेरिका पर हुए 9/11 हमले की गिनती दुनिया आज भी आतंकवाद के सबसे भयानक चेहरे के रूप में होती है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर एयरप्लेन के टकराने से ठीक 48 घंटे पहले अफगानिस्तान में एक ऐसी हत्या हुई थी, जिसने आगे आने वाली पूरी जंग का समीकरण बदल दिया था. 9 सितंबर 2001 को अफगानिस्तान के सबसे चर्चित सैन्य कमांडर और तालिबान के सबसे बड़े विरोधी अहमद शाह मसूद की हत्या कर दी गई थी. बाद में सामने आई जांचों और अमेरिकी अधिकारियों के बयानों के मुताबिक इस हमले के पीछे अलकायदा का हाथ था.
कौन थे अहमद शाह मसूद?
अहमद शाह मसूद को पंजशीर का शेर कहा जाता था. 1980 के दशक में उन्होंने सोवियत सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी और बाद में तालिबान के उदय के खिलाफ सबसे मजबूत प्रतिरोध का चेहरा बने. जब 1990 के दशक के आखिर तक तालिबान ने अफगानिस्तान के अधिकांश हिस्से पर कब्जा कर लिया था, तब भी मसूद के नेतृत्व वाला उत्तरी गठबंधन (Northern Alliance) उनके सामने डटा रहा. पंजशीर पर तालिबान तबतक कब्जा ना कर सका जबतक अहमद मसूद जिंदा रहे.
पत्रकार बनकर पहुंचे थे हमलावर
9 सितंबर 2001 को मसूद उत्तरी अफगानिस्तान में अपने मुख्यालय में मौजूद थे. वहां दो लोग पहुंचे जिन्होंने खुद को विदेशी मीडिया (अल-जजीरा) का पत्रकार बताया. कई दिनों तक इंतजार करने और सुरक्षा जांच से गुजरने के बाद उन्हें इंटरव्यू की अनुमति मिली. लेकिन ये पत्रकार नहीं, बल्कि अल-कायदा के आत्मघाती हमलावर थे. इंटरव्यू शुरू होते ही उन्होंने कैमरे में छिपाए गए विस्फोटकों को उड़ा दिया. धमाका इतना शक्तिशाली था कि मसूद गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मौत हो गई. हमले में उनके करीबी सहयोगी भी मारे गए. इस हमले में कई लोग घायल हो गए थे.
9/11 से पहले ही क्यों बनाया गया निशाना?
इस हमले को विशेषज्ञों और अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने अलकायदा के प्लानिंग का हिस्सा बताया था. अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को अंदाजा हो गया था कि अमेरिका पर बड़े आतंकी हमले के बाद वॉशिंगटन जवाबी कार्रवाई करेगा. ऐसे में अगर अहमद शाह मसूद जीवित रहते तो वे अमेरिकी सेना के सबसे मजबूत स्थानीय सहयोगी साबित हो सकते थे. इसलिए 9/11 से पहले उन्हें रास्ते से हटाना अल-कायदा की रणनीति का हिस्सा था.
दिलचस्प बात यह है कि हमले से कुछ महीने पहले मसूद ने यूरोपीय संसद में चेतावनी दी थी कि अल-कायदा अमेरिका की धरती पर बड़े हमले की तैयारी कर रहा है. उस समय उनकी बात को उतनी गंभीरता से नहीं लिया गया, लेकिन दो दिन बाद 9/11 ने उनकी चेतावनी को सच साबित कर दिया.
CIA क्यों घबरा गई थी?
अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के अधिकारियों के लिए मसूद सिर्फ एक अफगान कमांडर नहीं थे, बल्कि तालिबान और अल-कायदा के खिलाफ उसके संभावित साझेदार भी थे. CIA अधिकारी गैरी बर्नटसेन ने बाद में लिखा कि मसूद की हत्या की खबर सुनकर उन्हें लगा कि शायद उत्तरी गठबंधन अब टूट जाएगा. वहीं तत्कालीन CIA निदेशक जॉर्ज टेनेट ने कहा था कि मसूद की मौत एक बड़ा झटका थी, लेकिन एजेंसी ने अफगानिस्तान में अन्य सहयोगियों से संपर्क बनाए रखा था.
हत्या के बाद क्या हुआ?
मसूद की हत्या के सिर्फ दो दिन बाद 11 सितंबर 2001 को अल-कायदा ने अमेरिका पर हमला कर दिया. इसके बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान में सैन्य अभियान शुरू किया. मसूद भले ही उस समय जीवित नहीं थे, लेकिन उनके उत्तरी गठबंधन ने अमेरिकी सेना के साथ मिलकर तालिबान शासन को सत्ता से हटाने में अहम भूमिका निभाई.
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इतिहासकारों का मानना है कि अहमद शाह मसूद की हत्या केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं थी. यह 9/11 से पहले अल-कायदा की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक कार्रवाई थी, जिसका मकसद अफगानिस्तान में अपने सबसे बड़े विरोधी को खत्म करना और आने वाली जंग के लिए मैदान साफ करना था.
-भारत एक्सप्रेस
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