अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को लेकर भारत-अमेरिका के रिश्तें में तल्खियां और तनाव चरम पर है. ये भी खबर है कि डोनाल्ड ट्रंप इस साल भारत में होने वाले क्वाड सम्मेलन में भाग लेने नहीं आएंगे. वहीं ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो (Peter Navarro) लगातार भारत विरोधी बयानबाजी कर रहे हैं.
इसके अलावा उन्होंने भारत पर ही रूस-यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा देने का आरोप लगाया औऱ कहा कि यूक्रेन में शांति का रास्ता भारत से होकर गुज़रता है. लोकिन पीटर नवारो की अब अपने ही देश में आलोचना हो रही है.
दो अमेरिकी विदेश मंत्रियों के पूर्व सलाहकार और एशिया विशेषज्ञ इवान ए. फेगेनबाम ने पीटक नवारो के भारत को लेकर तीखी बयानों की सख्त आलोचनी की है. उन्होंने कहा कि नवारो एक बेलगाम तोप है, जिनके बयानों से भारत-अमेरिका संबंधों दशकों से हो रहे सुधार पर पानी फिर सकता है.
इन लोगों ने 25 सालों की मेहनत को बर्बाद कर दिया
इसके अलावा पीटर नवारो ने एक बयान में कहा था कि यूक्रेन युद्ध के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ज़िम्मेदार हैं. इस पर फ़ीगेनबाम ने पोस्ट कर कहा, ‘इन लोगों ने अमेरिका-भारत संबंधों को फलदायी बनाने के लिए 25 साल की कड़ी और द्विपक्षीय मेहनत को बर्बाद कर दिया है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘यूक्रेन में शांति का रास्ता निश्चित रूप से नई दिल्ली से होकर नहीं जाता, और ऐसा कहना बिल्कुल बेतुका है.
नवारो बेलगाम तोप हैं
नवारो के मुताबिक, रूसी तेल आयात में भारत की हिस्सेदारी 2022 से पहले के एक प्रतिशत से बढ़कर 30 प्रतिशत से ज़्यादा यानी 15 लाख बैरल प्रतिदिन से ज़्यादा हो गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय रिफाइनरियां हर दिन 10 लाख बैरल से ज़्यादा रिफाइंड उत्पादों का निर्यात कर रही हैं, जिससे होने वाला मुनाफ़ा रूस के भंडार को बढ़ा रहा है. उन्होंने लिखा, ‘भारत अब प्रतिदिन 10 लाख बैरल से ज़्यादा रिफाइंड पेट्रोलियम का निर्यात करता है, जो उसकी तरफ से आयातित रूसी कच्चे तेल की मात्रा के आधे से भी ज़्यादा है.’
इन सब पर फेगेनबाम (Evan A. Feigenbaum) ने जवाब देते हुए कहा कि आजकल भारत के बारे में नीति बनाने वालों के लिए इतिहास, संदर्भ और राजनीति ज़्यादा मायने नहीं रखती. यह आदमी एक लापरवाह तोप है
इवान ए. फेगेनबाम ने कहा,
कुछ हफ़्ते पहले अलास्का में अमेरिकी राष्ट्रपति पुतिन के साथ मुस्कुरा रहे थे, जिससे कई भारतीयों को और भी ज़्यादा अविश्वास हो रहा है. और हथियारों की ख़रीद में भारत को “रणनीतिक मुफ़्तखोर” कहना बेवजह की बकवास और बेहद अनैतिहासिक है. लेकिन आजकल भारत के बारे में नीति बनाने वालों के लिए इतिहास, संदर्भ और राजनीति ज़्यादा मायने नहीं रखती. यह आदमी एक बेलगाम तोप है – लेकिन वित्त मंत्री ने भी लगभग यही बात कही है, यह सब या तो असंगठित और अनधिकृत है, जो काफ़ी चिंताजनक है, या फिर समन्वित और अधिकृत है. जो इसे नीति बना देगा.
उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई इस पर जल्द से जल्द रोक नहीं लगाता है तो संभावित रूप से बिखर सकते हैं. और हमें चीजों को अधिक उत्पादक ट्रैक पर वापस लाने के लिए संभवतः प्रशासन में बदलाव का इंतजार करना होगा.
These guys have tanked 25 years of painstaking and bipartisan work to build productive U.S.-India relations. “The road to peace in Ukraine” most certainly does not “run through New Delhi” and it is quite the deflection to say so. The President of the United States was smiling… https://t.co/NNljUpIzDv
— Evan A. Feigenbaum (@EvanFeigenbaum) August 29, 2025
राष्ट्रपति ट्रंप के वरिष्ठ व्यापार सलाहकार पीटर नवारो भारत के खिलाफ आक्रमक बने हुए हैं. उन्होंने भारत का रूस से तेल खरीदने पर इसे रूस-यूक्रेन के साथ जोड़ा और कहा कि भारत ने रूस के लिए खुद को ‘तेल के फंडिंग सेंटर’ के तौर पर बदल लिया है. उन्होंने दावा किया कि भारतीय रिफाइनर कालाबाजारी वाले तेल से मुनाफा कमा रहे हैं जबकि यूक्रेनी मर रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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