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फिलीपींस, वियतनाम के बाद नए कस्टमर: ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत देखने दिल्ली आए ASEAN राजनयिक, फिदा हुए सिंगापुर के दूत

ASEAN ENVOYS VISIT BRAHMOS HEADQUARTERS: सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग समेत आसियान (ASEAN) देशों के वरिष्ठ राजनयिकों के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित ब्रह्मोस एयरोस्पेस मुख्यालय का दौरा किया. ब्रह्मोस के पीछे की इंजीनियरिंग को ‘आंखें खोलने वाला और ज्ञानवर्धक’ अनुभव बताया.

Vijay Ram Edited by Vijay Ram

ASEAN Diplomats Visit BrahMos Headquarters Delhi: दक्षिण चीन सागर में जारी भू-राजनीतिक तनाव और चीन के आक्रामक रुख के बीच भारत की स्वदेशी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ (BrahMos) आसियान (ASEAN) देशों की पहली पसंद बनती जा रही है. बुधवार को सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग के नेतृत्व में भारत में तैनात आसियान सदस्य देशों के राजनयिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली स्थित ब्रह्मोस एयरोस्पेस मुख्यालय का महत्वपूर्ण दौरा किया.

सिंगापुर के उच्चायुक्त बोले- ‘आंखें खोलने वाला रहा दौरा’

सिंगापुर के उच्चायुक्त साइमन वोंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर ब्रह्मोस मुख्यालय के दौरे की तस्वीरें साझा करते हुए अपने अनुभव की प्रशंसा की. उन्होंने लिखा:

“आज आसियान के सहयोगी देशों के प्रतिनिधियों के साथ नई दिल्ली स्थित ब्रह्मोस मुख्यालय का दौरा बेहद आंखें खोलने वाला (ज्ञानवर्धक) रहा. भारत के तेजी से बढ़ते रक्षा उद्योग और ब्रह्मोस मिसाइल के पीछे की असाधारण इंजीनियरिंग को करीब से समझने का यह एक बेहतरीन और शानदार अवसर था.”

उच्चायुक्त वोंग ने ब्रह्मोस टीम द्वारा किए गए गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभार जताया और इस रणनीतिक यात्रा के सफल समन्वय व आयोजन के लिए नई दिल्ली स्थित फिलीपींस दूतावास की विशेष सराहना की.

फिलीपींस, वियतनाम और इंडोनेशिया में ब्रह्मोस का परचम

चीन के साथ समुद्री सीमा विवादों का सामना कर रहे दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की मांग तेजी से बढ़ी है:

फिलीपींस: भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सौदा करने वाला पहला देश बना था. साल 2022 में करीब 37.5 करोड़ डॉलर का ऐतिहासिक समझौता हुआ था. फिलीपींस को मिसाइलों की पहली खेप 2024 में सौंपी गई थी, जबकि दूसरी खेप अप्रैल 2025 में सफलतापूर्वक डिलीवर की गई.

वियतनाम: भारत ने मई 2026 में सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित ‘शांगरी-ला डायलॉग’ के दौरान वियतनाम के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल और तटीय रक्षा प्रणालियों (Coastal Defence System) के निर्यात के ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए. भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इस रणनीतिक डील की पुष्टि की थी.

इंडोनेशिया: जुलाई 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जकार्ता की आधिकारिक यात्रा के दौरान इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस मिसाइल और भारत की स्वदेशी दृष्टि-सीमा से परे हवा से हवा में मार करने वाली ‘अस्त्र’ (Astra) मिसाइल प्रणाली के निर्यात को लेकर बड़ा रक्षा समझौता हुआ.

एंटी-शिप और लैंड-अटैक में दुनिया की सबसे घातक मिसाइल

ब्रह्मोस मिसाइल भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस के एनपीओ मशिनोस्ट्रोयेनिया (NPOM) का एक संयुक्त उद्यम है. ध्वनि की गति से करीब तीन गुना तेज (मैक 2.8) रफ्तार से उड़ान भरने वाली यह दुनिया की सबसे तेज परिचालन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है. डीआरडीओ के अनुसार, ब्रह्मोस को आधुनिक युद्धक्षेत्र की जरूरतों के हिसाब से युद्धपोत रोधी (Anti-Ship) और सतह पर सटीक प्रहार (Land-Attack) दोनों ही भूमिकाओं के लिए तैयार किया गया है. आसियान देशों के राजनयिकों के इस ताजा दौरे से यह संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ और देश भी अपनी संप्रभुता और तटीय सुरक्षा के लिए ब्रह्मोस के खरीदारों की कतार में शामिल हो सकते हैं.

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